नर्सों ने की वैवाहिक स्थानांतरण संबंधी नीति की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स और केंद्र से मांगा जवाब

Spousal Transfer of Nurses: याचिका में यह भी कहा गया है कि एम्स में वैवाहिक आधार पर स्थानांतरण नीति के नहीं होने की वजह से ‘महिलाओं के साथ अप्रत्यक्ष तौर पर भेदभाव’ हुआ, जिन्हें ‘परिवार की प्राथमिक देखभालकर्ता’ होने के कारण अपने रोजगार के अवसरों को छोड़ना पड़ा और इसलिए यह अवैध है. यह भी कहा कि यह अनुच्छेद 14 के तहत गैर-भेदभाव की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन भी है.

Spousal Transfer of Nurses: केंद्र सरकार के अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों ने आईएएस अधिकारियों की तरह पति-पत्नी का एक ही शहर में ट्रांसफर करने की मांग की है. इनका कहकना है कि कार्मिक विभाग ने ऐसा नियम बना रखा है, लेकिन नर्सों के मामले में इसे लागू नहीं किया जाता. इसलिए स्वास्थ्य विभाग को वैवाहिक स्थानांतरण संबंधी नीति बनानी चाहिए. दिल्ली हाईकोर्ट में इस विषय पर जोरदार बहस के बाद जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्र सरकार के साथ-साथ एम्स दिल्ली, एम्स भोपाल, एम्स भुवनेश्वर, एम्स पटना और अन्य एम्स को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
नर्स संघों की ओर से दायर याचिका में वकील ने कहा है कि इस नीति का नहीं होना, महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण है. अदालत के समक्ष अखिल भारतीय सरकारी नर्स फेडरेशन, नर्सिंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन, एम्स ऋषिकेश, एम्स पटना नर्स यूनियन और मंगलागिरि एम्स नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने याचिका की ओर से यह याचिका दाखिल की गयी है.

नर्सों के परिवार के अधिकार से संबंधित है याचिका – वकील

याचिकाकर्ताओं की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने दलीलें पेश की. उन्होंने कहा कि याचिकाएं ‘नर्सों के परिवार’ के अधिकार से संबंधित हैं और वैवाहिक आधार पर स्थानांतरण के मुद्दे पर एक ‘शून्यता’ है, क्योंकि स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारियों के ऐसे स्थानांतरण के लिए फिलहाल कोई नियम नहीं है.

नर्स यूनियनों के वकीलों ने की ट्रांसफर नीति की मांग

याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट सत्य सभरवाल और पलक बिश्नोई ने भी अपनी दलीलें रखीं. उन्होंने कहा कि दो एम्स अस्पतालों के बीच, एम्स और राष्ट्रीय महत्व के अन्य संस्थानों, एम्स और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन किसी भी संस्थान तथा एम्स और राज्य सरकार के अधीन किसी भी संस्थान में ट्रांसफर की नीति की मांग की जा रही है.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

वकील का दावा- महिलाओं से अप्रत्यक्ष तौर पर हुआ भेदभाव

याचिका में यह भी कहा गया है कि एम्स में वैवाहिक आधार पर स्थानांतरण नीति के नहीं होने की वजह से ‘महिलाओं के साथ अप्रत्यक्ष तौर पर भेदभाव’ हुआ, जिन्हें ‘परिवार की प्राथमिक देखभालकर्ता’ होने के कारण अपने रोजगार के अवसरों को छोड़ना पड़ा और इसलिए यह अवैध है. यह भी कहा कि यह अनुच्छेद 14 के तहत गैर-भेदभाव की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन भी है. याचिका में कहा गया कि यह संविधान के अनुच्छेद 16 और 15 के तहत समान अवसर और लैंगिक समानता का भी उल्लंघन है. मामले की अगली सुनवाई अब 30 जुलाई को होगी.

इसे भी पढ़ें

140 पेटी नकली शराब के साथ 4 गिरप्तार, रामगढ़ से हजारीबाग जा रहा था सफेद पिकअप

VIDEO: रांची-पटना हाई-वे पर सुरेंद्रनाथ स्कूल के पास धू-धू कर जला ट्रांसफॉर्मर, मचा हड़कंप

NUSRL में 200MW के सोलर प्लांट का उद्घाटन, चीफ जस्टिस बोले- कानूनी शोध और विशेषज्ञता है अहम

पाकुड़ में ताड़ी बेचने का विरोध करने पर अधेड़ की हत्या, पुलिस ने 2 को पकड़ा

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं.

अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है.

वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं.

भौगोलिक विशेषज्ञता : वर्तमान में उनका फोकस पश्चिम बंगाल है. उन्होंने झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की खबरों पर भी काम किया है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है.

मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :-

राज्य की राजनीति और शासन : वर्पतमान में श्चिम बंगाल की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज.

सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग.

जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित रिपोर्टिंग.

डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है.

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर पत्रकारिता, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव और तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >