फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में सपा नेता आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बेल

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में सपा नेता आजम खान की पत्नी और बेटे को भी इलाहाबाद हार्ईकोर्ट ने राहत दे दी है.

Azam Khan : फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में सपा के दिग्गज नेता आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने इस मामले में उनकी पत्नी और बेटे को भी राहत देते हुए तीनों को बेल दे दिया है. आजम खान के वकील शरद शर्मा ने न्यूज एजेंसी एनआई को बताया कि कोर्ट ने तीनों को जमानत दे दी है. जस्टिस संजय कुमार सिंह ने केवल आजम खान की सजा पर रोक लगाई जबकि तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम खान को राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने सपा नेता आजम खान, उनकी पत्नी और बेटे द्वारा दायर तीन आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था.शरद शर्मा ने बताया कि यह मामला 2019 का है, रामपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. लोअर कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई थी. उसी के खिलाफ यहां याचिका दाखिल की गई थी. वकील शरद शर्मा ने बताया कि अभी मामला चलेगा. दरअसल इनका दो जन्म प्रमाण पत्र था, जिसमें अलग-अलग तारीख दर्ज थी.

शरद शर्मा ने यह भी बताया कि मैं अभी और कुछ नहीं कह सकता क्योंकि जजमेंट अभी पूरा नहीं आया है. कोर्ट ने जो कुछ कहा उसके आधार पर यही मुख्य बातें सामने आई हैं. पूरा जजमेंट पढ़ने के बाद ही इसपर कुछ कहा जा सकेगा. ज्ञात हो कि 2017 से विधानसभा चुनाव में नकली जन्म प्रमाण पत्र का मामला सामने आया था. अब्दुल्ला आजम के बारे में यह कहा था कि उनकी उम्र चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे लेकिन उन्होंने नकली जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा था. आजम खान, तंजीन फातिमा और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा हुई थी.

2023 में सुनाई गई थी सजा

आजम खान, उनकी पत्नी और बेटे ने अब्दुल्ला के जन्म प्रमाणपत्र के कथित फर्जीवाड़ा मामले में रामपुर के सत्र न्यायालय द्वारा 18 अक्टूबर 2023 को सुनाई गई सात साल की सजा को चुनौती दी थी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह मामला तीन जनवरी 2019 का है. रामपुर के निवासी और मौजूदा समय में रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने अब्दुल्ला आजम खान के लिए दो जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में आजम खान, उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया था. इसके बाद सत्र अदालत ने 18 अक्टूबर 2023 को इस मामले में तीनों को सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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