Sonia Gandhi Book : कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी अब अपनी जिंदगी के उन हिस्सों को किताब के जरिए दुनिया के सामने लाने जा रही हैं, जिन पर उन्होंने दशकों तक सार्वजनिक रूप से बहुत कम बात की. नेहरू-गांधी परिवार में बहू बनकर आने से लेकर पति राजीव गांधी की हत्या, राजनीति में कदम रखने और कांग्रेस की कमान संभालने तक की उनकी कहानी अब उनकी अपनी जुबानी सामने आएगी.
प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ ने मंगलवार को घोषणा की कि सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को प्रकाशित होगी. किताब में वह अपने निजी जीवन के साथ-साथ भारत में पिछले छह दशकों के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों को भी अपने नजरिए से पेश करेंगी.
'मेरे परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया, लेकिन...'
किताब को लेकर जारी बयान में सोनिया गांधी ने कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनकी नजर में परिवार के लोगों के इरादों, काम और मानवीय कमजोरियों की सच्चाई तक बहुत कम बातें पहुंच पाई हैं.
उन्होंने कहा कि यह किताब उनके परिवार के मानवीय पक्ष को सम्मान देने की कोशिश है. साथ ही, उनकी कहानी पाठकों को उस भारत को देखने का एक अलग नजरिया देगी, जिसे उन्होंने लगभग छह दशकों तक करीब से देखा है.
राजीव गांधी से मुलाकात ने बदल दी जिंदगी
सोनिया गांधी मूल रूप से इटली की रहने वाली हैं. इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई. राजीव गांधी, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती और इंदिरा गांधी के बेटे थे.
राजीव गांधी से शादी के बाद सोनिया गांधी ने नेहरू-गांधी परिवार में प्रवेश किया. हालांकि उस समय उन्होंने राजनीति से दूरी बनाए रखी और अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक जीवन से अलग रखने की कोशिश की.
लेकिन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद परिवार की परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं. राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने और कुछ वर्षों बाद 1991 में उनकी भी हत्या कर दी गई.
'दिल टूटने और नुकसान ने मुझे राजनीति में धकेला'
सोनिया गांधी के मुताबिक, लगातार हुए इन बड़े व्यक्तिगत नुकसान ने अंततः उन्हें राजनीति की दुनिया में आने के लिए मजबूर किया.
उन्होंने कहा, “दिल टूटने और नुकसान के अहसास ने ही मुझे राजनीति की सार्वजनिक दुनिया में धकेला.” इससे पहले तक वह अपनी निजता को बेहद संभालकर रखती थीं.
बाद में सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली और लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं. उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में वापसी भी की. हालांकि 2004 और 2009 में प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम चर्चा में रहने के बावजूद उन्होंने खुद प्रधानमंत्री बनने से दूरी बनाए रखी.
पहली बार अपनी कहानी अपनी जुबानी
सोनिया गांधी ने माना कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए आसान नहीं था. उनके अनुसार, इसका मतलब उन यादों और अनुभवों को दोबारा सामने लाना था, जिन्हें उन्होंने लंबे समय से अपने भीतर संजोकर रखा था.
अब ‘Belonging: A Journey of Love’ के जरिए पाठकों को सोनिया गांधी के जीवन का वह पक्ष देखने को मिलेगा, जो राजनीतिक भाषणों और सार्वजनिक बयानों से अलग है. किताब में निजी रिश्तों, परिवार, प्रेम, दुख और राजनीति के बीच उनकी यात्रा कितनी खुलकर सामने आती है, इसका जवाब 10 नवंबर को किताब के प्रकाशित होने के बाद मिलेगा.
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