कोर्ट ने तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए पहले दो हफ्ते का समय दिया था, लेकिन बाद में उसके वकील के अनुरोध पर इस समय-सीमा को बढ़ाकर चार हफ्ते कर दिया गया है.
तेजपाल ने कहा, हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
हाई कोर्ट की गोवा पीठ के जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जमसांडेकर की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, "हम निचली अदालत के बरी करने के आदेश को निरस्त करते हैं और प्रतिवादी को दोषी करार देते हैं." अदालत के इस फैसले के बाद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में 62 वर्षीय तरुण तेजपाल ने कहा कि वह इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे.
इन धाराओं के तहत ठहराया गया दोषी
अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(एफ) (संरक्षक या विश्वास की स्थिति में दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग) के तहत दोषी माना है.
अदालत में तेजपाल की नरमी की गुहार, सॉलिसिटर जनरल की सख्त रुख की मांग
सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद तेजपाल ने खुद को "राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार" बताया और दो बेटियों का पिता व वरिष्ठ नागरिक होने का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग की थी
गोवा सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग की थी. उन्होंने कहा कि पीड़िता आरोपी की सहकर्मी होने के साथ-साथ उसकी बेटी की दोस्त भी थी. मेहता ने दलील दी कि 'नहीं का मतलब नहीं' होता है और समाज में ऐसा संदेश जाना जरूरी है जो अपराध की गंभीरता के अनुरूप हो. उन्होंने निचली अदालत की उस धारणा को भी खारिज किया कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला का व्यवहार किसी खास ढर्रे पर ही होना चाहिए.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में आयोजित 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान एक 5-स्टार होटल की लिफ्ट में तेजपाल पर अपनी कनिष्ठ सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म करने का आरोप लगा था. 2021 में सत्र अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.
