संजय राउत का दावा-50-50 करोड़ में खरीदे जा रहे हैं सांसद, 15 करोड़ दिया एडवांस, बौखलाहट में मीडिया के सामने दी गाली

Sanjay Raut : शिवसेना (UBT) के लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की. उन्होंने स्पीकर से यह आग्रह किया कि वे किसी भी गैर-कानूनी दलबदल को होने से रोकें. इससे पहले संजय राउत ने मीडिया के सामने यह दावा किया कि सांसदों को 50-50 करोड़ देकर खरीदा जा रहा है. प्रत्येक सांसद को 15-15 करोड़ रुपए एडवांस में दिये गए हैं.

Sanjay Raut : उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक बार फिर फूट पड़ने की आशंका के बीच पार्टी के नेता संजय राउत ने एक प्रेस काॅन्फ्रेंस किया. बुधवार को आयोजित इस प्रेस काॅफ्रेंस में संजय राउत ने बागी सांसदों को चुनौती दी कि अगर वे पाला बदलना चाहते हैं तो इस्तीफा दे दें. उन्होंने कहा कि इन सांसदों को जीत शिव सेना के चिह्न पर मिली है ना कि मोदी के चेहरे पर. अगर वे धोखा करना चाहते हैं, तो पहले इस्तीफा दे दें. मीडिया को संबोधित करते हुए संजय राउत इतने गुस्से में आ गए कि उन्होंने गाली-गलौज की भाषा पर उतर आए.

सांसदों को 15 करोड़ एडवांस में दिया गया

शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने दावा किया कि कहा कि मुझे जानकारी है कि सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये एडवांस में दिए गए, जिसके बाद वे नांदेड़ और पुणे समेत तीन जगहों से चार्टर फ्लाइट में सवार हुए. उन्होंने यह भी दावा किया कि सांसदों को 50-50 करोड़ देने का वादा किया गया है. हमने कल पार्लियामेंट्री पार्टी मीटिंग के लिए व्हिप जारी किया है. सभी नौ सांसदों को कल सुबह 11 बजे पार्टी की मीटिंग में शामिल होने को कहा है. जो लोग पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने गए हैं, उन्हें पार्टी के साथ गद्दारी करने का कोई अधिकार नहीं है.

हम चुप नहीं बैठेंगे : संजय राउत

संजय राउत ने पीसी में कहा कि अगर 2022 की तरह पार्टी में फिर फूट डालने की कोशिश की गई तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसेना (उबाठा) के सांसद चुप नहीं बैठेंगे. इस मौके पर संजय राउत के साथ उनकी पार्टी के नौ लोकसभा सदस्यों में से केवल तीन सांसद- अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ मौजूद थे.उन्होंने बागी सांसदों से कहा कि उद्धव ठाकरे और शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ताओं ने सांसदों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है. अगर वे पाला बदलना है तो पहले इस्तीफा दें.हालांकि उन्होंने कहा कि सांसदों के पार्टी छोड़ने की उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं है.

ये सांसद बना सकते हैं अलग ग्रुप

शिवसेना (UBT) के चुने हुए सांसदों को अपनी तरफ खींचने की शिवसेना की कोशिशों को नाम दिया गया है-ऑपरेशन टाइगर.शिंदे कैंप के नेताओं का दावा है कि शिवसेना (UBT) के छह सांसद एक अलग ग्रुप बना सकते हैं और शिवसेना के साथ आ सकते हैं. इससे पहले वे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक लेटर दे सकते हैं.जिन छह सांसदों के अलग ग्रुप बनाने की संभावना है, उनके नाम हैं-संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट).

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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