ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने बुधवार (26 अगस्त) को बताया कि कैलाश यात्रा से लौट रहे 77 तीर्थयात्री तिब्बत के ग्यिरोंग स्थित इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद थे. इसी दौरान इलाके में अचानक तेज फ्लैश फ्लड आ गई. बाढ़ का पानी इमिग्रेशन सेंटर और सीमा से लगे शहर के बड़े हिस्से में भर गया. बताया गया कि यात्रा से लौट रहा यह ग्रुप कागजी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए इमिग्रेशन कार्यालय में रुका था, तभी बाढ़ ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया. फिलहाल इन सभी तीर्थयात्रियों की स्थिति और उनके ठिकाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.
गुरु सद्गुरु ने कहा, “इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद तीर्थयात्रियों की स्थिति और उनके ठिकाने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. रेस्क्यू टीमें नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में स्थिति का जायजा लेने में जुटी हैं.”
ईशा फाउंडेशन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सद्गुरु को गुरुवार को उसी इमिग्रेशन सेंटर का दौरा करना था, जहां बाढ़ आने के समय कैलाश यात्रा से लौट रहे 77 तीर्थयात्री मौजूद थे.
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तीर्थयात्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान
नेपाल के पहाड़ी रसुवा जिले में भी भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही मचाई है. तिब्बत से सटे इस इलाके में आई फ्लैश फ्लड से अब तक 150 से अधिक लोगों की मौत की खबर है. कई गांव और निर्माणाधीन परियोजनाएं भी बह गईं. नेपाल पर्यटन बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, 384 लोग अब तक संपर्क से बाहर हैं. ये सभी तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं.
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज
अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की आशंका जताते हुए भोटे कोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों और ऊंचे इलाकों में जाने की सलाह दी है. प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है. पुलिस और सेना की टीमें मौके पर पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने में जुटी हैं.
