सनातन धर्म का विरोध और अंत करने के लिए हुआ विपक्षी दलों का गठबंधन? सोनिया गांधी से रविशंकर प्रसाद का सवाल

रविशंकर प्रसाद ने तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री पोनमुडी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्षी दलों का गठबंधन ही सनातन धर्म का विरोध करने और उसका अंत करने के लिए हुआ है. दरअसल उनका बयान वह सच है जो उनका हिडेन एजेंडा है.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी को लेकर विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. रविशंकर प्रसाद ने आज प्रेस काॅन्फ्रेंस कर कहा कि विपक्षी दलों का गठबंधन ही सनातन धर्म का विरोध करने और उसका अंत करने के लिए हुआ है. रविशंकर प्रसाद ने पहला सवाल सोनिया गांधी से किया और कहा कि भारत की संस्कृति और विरासत का अपमान हो रहा है और आप चुप हैं, आखिर क्यों? मैंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से भी सवाल किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया.

सनातन धर्म का विरोध विपक्ष का हिडेन एजेंडा

रविशंकर प्रसाद ने आज तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री पोनमुडी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विपक्षी दलों का गठबंधन ही सनातन धर्म का विरोध करने और उसका अंत करने के लिए हुआ है. दरअसल उनका बयान वह सच है जो उनका हिडेन एजेंडा है. इसी एजेंडे के तहत विपक्षी गठबंधन काम कर रहा है. रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पार्टी से यह सवाल किया कि क्या उनके अंदर किसी अन्य धर्म और उनके देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने की हिम्मत है?

बीजेपी की तरफ से सोनिया गांधी से सवाल

तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री पोनमुडी ने भी सनातन धर्म पर टिप्पणी वहीं की थी जहां उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना बीमारियों से की और उसका अंत करने की बात कही थी. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मैं बीजेपी की तरफ से सोनिया गांधी से सवाल करता हूं कि वे चुप क्यों हैं? क्या उनकी चुप्पी को हम मौनं स्वीकृति: लक्षणम् मान लूं. सोनिया जी आप वोट की राजनीति के लिए किस हद तक जाएंगी? भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने आज दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में एक प्रेस काॅन्फ्रेंस आयोजित की थी.


सत्य एक है, उस तक पहुंचने के रास्ते अलग

सनातन धर्म यह मानता है कि सत्य एक है. उस तक पहुंचने का मार्ग अलग हो सकता है. लेकिन सबका रास्ता उसी सत्य तक जाता है, इसलिए सभी के मार्ग का समर्थन करना चाहिए. लेकिन अन्य मार्गों पर चुप्पी और सनातन पर निकृष्ट टिप्पणी, यह स्वीकार्य नहीं होगा. सोनिया जी यह चुप्पी ठीक नहीं. आप कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता हैं, बावजूद इसके आप चुप हैं, एेसा क्यों?

सनातन में कोई भी ईश्वर को प्राप्त कर सकता है

सनातन धर्म की यह खासियत है कि आप इस धर्म में चाहे किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय में पैदा हुए हों अपने तप से ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं. माता शबरी, संत रविदास, केवट महाराज जैसे लोग इसके उदाहरण हैं. माता शबरी भील थीं लेकिन प्रभु राम उनका जूठन खाते हैं, उनकी भक्ति और प्रेम के वशीभूत होकर. इस देश में गरीब से गरीब लोग अपनी साधना से ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं.

सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मैं सोनिया जी से कहना चाहता हूं कि सनातन का अपमान हिंदुस्तान नहीं सहेगा. आपका गठबंधन जो चाहता है, सनातन का अंत संभव नहीं है और मैं बीजेपी की ओर से यह कहना चाहता हूं कि हम इसका विरोध करेंगे. हम गांव-गांव तक विकास पहुंचाएंगे और इस बात को भी पहुंचाएंगे, क्योंकि हमें अपने विरासत की रक्षा करनी है. इस मौके पर रविशंकर प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर का भी जिक्र किया और कहा कि आज के युवा साहित्यकारों ने यह साबित कर दिया है कि महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर का सोना लुटने नहीं बल्कि सनातन को खत्म करने आया था. वह मंदिर से बुतपरस्ती समाप्त करना चाहता था.

उदयनिधि स्टालिन ने की विवादित टिप्पणी

गौरतलब है कि डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने पिछले दिनों यह बयान दिया था कि सनातन धर्म का अंत किया जाना चाहिए, क्योंकि इस धर्म में समानता और सामाजिक न्याय नहीं है. अपने बयान में उन्होंने कुछ आपत्तिजनक शब्दों का भी प्रयोग किया था. उदयनिधि स्टालिन के इस बयान के बाद बीजेपी हमलावर है. हिंदू जनजागृति समिति ने भी यह मांग की है कि अविलंब उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कार्रवाई हो. समिति ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म का इतना बड़ा अपमान किया, बावजूद इसके उनके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं हुआ, यह बहुत ही पीड़ादायक है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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