राहुल गांधी ने कहा, "RSS के साथ मेरी सबसे बड़ी समस्या यही है. उन्होंने तय कर लिया है कि वे 1.5 अरब लोगों का सच जानते हैं. जबकि सच यह है कि इस देश के लोग ही अपनी सच्चाई खुद जान सकते हैं। अगर मैं भी यह मानने लगूं कि मैं आपकी सच्चाई जानता हूं, तो यह मेरी बेवकूफी होगी क्योंकि मैंने वे हालात नहीं देखे जो आपने देखे हैं." उन्होंने आगे कहा कि आज देश में लड़ाई पर्यावरण या मीडिया की आजादी से कहीं ज्यादा वैचारिक है. कुछ लोगों ने सिस्टम पर कब्जा कर लिया है और वे हर नागरिक पर अपनी सोच थोप रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि 'मैं छात्रों को माफ करता हूं' जैसे बयान यह दिखाते हैं कि सत्ता में बैठे लोग खुद को सर्वज्ञ और जनता को अज्ञानी मानते हैं.
'दो-तीन लोगों के एकाधिकार से नहीं मिलेगा स्वराज'
देश की आर्थिक स्थिति और पूंजीपतियों के कब्जे पर चिंता जताते हुए राहुल गांधी ने कहा, अगर देश के तमाम बिजनेस, एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमेंट कंपनियां कुछ चुनिंदा लोगों के पास होंगी, तो आम लोगों के लिए 'स्वराज' की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और राजीव गांधी का स्वराज का विजन ऐसी महंगी शिक्षा, अन्यायपूर्ण परीक्षा प्रणाली और एकाधिकार वाली वित्तीय व्यवस्था के साथ कभी साकार नहीं हो सकता. इसके लिए पंचायती राज, विधायकों और सांसदों तक फैली एक मजबूत और जमीनी राजनीतिक व्यवस्था की जरूरत है.
'17% अल्पसंख्यकों और वंचितों को हाशिए पर धकेलने की साजिश'
राहुल गांधी ने भाजपा पर सामाजिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की 17% आबादी (मुसलमान, ईसाई, सिख) को यह अहसास कराया जा रहा है कि उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है. वहीं 10% आदिवासियों की जमीनों पर नजर है और 15% दलितों के सामाजिक दमन की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस देश के हर व्यक्ति—चाहे वह किसी भी धर्म, समुदाय, उम्र या लिंग का हो—को यह महसूस होना चाहिए कि यह देश उसका है. इसी सोच और व्यवस्था को बदलने के लिए आज संघर्ष की जरूरत है.
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