नयी दिल्ली : अत्याधुनिक फाइटर प्लेन राफेल आज फ्रांस से भारत पहुंच गया. फाइटर प्लेन के स्वागत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत में ट्वीट किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा है- राष्ट्ररक्षासमं पुण्यं, राष्ट्ररक्षासमं व्रतम्, राष्ट्ररक्षासमं यज्ञो, दृष्टो नैव च नैव च।। नभः स्पृशं दीप्तम्…स्वागतम्! #RafaleInIndia
प्रधानमंत्री के ट्वीट का अर्थ है-राष्ट्र की रक्षा सबसे बड़ा पुण्य है, राष्ट्र की रक्षा सबसे बड़ा व्रत है, राष्ट्र की रक्षा सबसे बड़ा यज्ञ है. इसके जैसा कोई नहीं, कोई नहीं. आकाश को छूने वाले दीपकों का स्वागत.
ज्ञात हो कि देश में सुखोई की खरीद के करीब 23 साल बाद अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान खरीदा गया है. पांच राफेल लड़ाकू विमानों का बेड़ा फ्रांस से आज देश के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अंबाला एयर बेस पर पहुंच गया. इन विमानों के वायुसेना में शामिल होने के बाद देश को आस-पड़ोस के प्रतिद्वंद्वियों की हवाई युद्धक क्षमता पर बढ़त हासिल हो जायेगी.
निर्विवाद ट्रैक रिकॉर्ड वाले इन राफेल विमानों को दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है. फ्रांस के बोरदु शहर में स्थित मेरिगनेक एयरबेस से 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करके ये विमान आज दोपहर हरियाणा में स्थिति अंबाला एयरबेस पर उतरे. राफेल विमानों के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद दो सुखोई 30एमकेआई विमानों ने उनकी आगवानी की और उनके साथ उड़ते हुए अंबाला तक आये.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल के भारत पहुंचने पर ट्वीट किया है, ‘‘बर्ड्स सुरक्षित उतर गए हैं.” वायुसेना में लड़ाकू विमानों को ‘बर्ड’ (चिड़िया) कहा जाता है. सिंह ने ट्वीट किया है, ‘‘राफेल लड़ाकू विमानों का भारत पहुंचना हमारे सैन्य इतिहास के नये अध्याय की शुरुआत है. ये बहुद्देशीय विमान भारतीय वायुसेना की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करेंगे.”
राजग सरकार ने 23 सितंबर, 2016 को फ्रांस की एरोस्पेस कंपनी दसाल्ट एविएशन के साथ 36 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था. गौरतलब है कि इससे पहले तत्कालीन संप्रग सरकार करीब सात साल तक भारतीय वायुसेना के लिए 126 मध्य बहुद्देशीय लड़ाकू विमानों के खरीद की कोशिश करती रही थी, लेकिन वह सौदा सफल नहीं हो पाया था.
दसाल्ट एविएशन के साथ आपात स्थिति में राफेल विमानों की खरीद का यह सौदा भारतीय वायुसेना की कम होती युद्धक क्षमता में सुधार के लिए किया गया था, क्योंकि वायुसेना के पास फिलहाल 31 लड़ाकू विमान हैं जबकि वायुसेना के स्क्वाड्रन में इनकी स्वीकृत संख्या के अनुसार, कम से कम 42 लड़ाकू विमान होने चाहिए.
Posted By : Rajneesh Anand
