Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की. यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी. उन्होंने कहा- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की अभी बातचीत हुई. उन्होंने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी शामिल हैं. 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद से पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की यह पहली बातचीत है. वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति से मीडिल ईस्ट के मौजूदा हालात पर चर्चा हुई.
पीएम मोदी ने कहा- शांति और स्थिरता के प्रयासों में समर्थन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर हुई बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों नेता शांति और स्थिरता बढ़ाने के प्रयासों पर संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं. भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. बातचीत के बाद पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा…
“मुझे राष्ट्रपति ट्रंप का फोन आया और पश्चिम एशिया की स्थिति पर उपयोगी विचारों का आदान-प्रदान हुआ. भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुला, सुरक्षित और सुलभ रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है.
ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत का दावा किया
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के साथ चल रहे गतिरोध में संभावित नरमी के संकेत दिए हैं. उन्होंने सोमवार को कहा था कि उनका प्रशासन पहले से ही तेहरान के साथ सार्थक वार्ता में लगा हुआ है. वार्ता के बाद ही अमेरिका अगला कदम उठाएगा. अमेरिका ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था इसके बाद इसे बढ़ाकर पांच दिन कर दिया था.
पीएम मोदी ने संवाद के माध्यम से समाधान पर दिया जोर
मंगलवार को संसद में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में युद्ध की बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने पश्चिम एशिया के अधिकांश देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की फोन वार्ता की है. पीएम मोदी ने बताया कि भारत खाड़ी देशों के साथ निरंतर संपर्क में है और ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी बातचीत जारी रखी जा रही है. उन्होंने कहा कि कूटनीति के माध्यम से भारत युद्ध की स्थिति में भी अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है. भारत ने इस मुद्दे को संवाद के जरिए हल करने का विकल्प चुना है.
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