प्लास्टिक के बोतल से बने जैकेट में संसद पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी, पर्यावरण संरक्षण के लिए दिया ये संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा ही अपने कपड़ों को लेेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है. इस बार के बजट में भी सरकार का फोकस ग्रीन ग्रोथ पर दिखा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जब संसद पहुंचे तो उनका जैकेट (बंडी) आकर्षण का केंद्र बना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जैकेट रिसाइकिल किये गये प्लास्टिक के बोतल से बनाया गया है. इस जैकेट को पहनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सस्टेनेबिलिटी का संदेश दिया है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा ही अपने कपड़ों को लेेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है. इस बार के बजट में भी सरकार का फोकस ग्रीन ग्रोथ पर दिखा है.

बंद गले के जैकेट में संसद पहुंचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब आज राज्यसभा पहुंचे तो वे बंद गले का जैकेट पहने हुए थे. इस बंडी का रंग आसमानी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देंगे. प्रधानमंत्री तीन बजे के बाद सदन में बो लने वाले हैं.

unbottled अभियान की शुरुआत

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार छह तारीख को unbottled अभियान की शुरुआत की थी. इस अभियान के तहत उन्होंने रिसाइकिल किये गये बोतल से बने यूनिफाॅर्म को लाॅन्च किया था. प्रधानमंत्री आज रिसाइकिल किये गये बोतल से बने जैकेट को पहनकर आये हैं, तो उसके पीछे उनका मैसेज पर्यावरण का संरक्षण है.

पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली 

मोदी सरकार के इस बजट में ग्रीन ग्रोथ पर खासा फोकस किया गया है. लाइफ मिशन को बढ़ावा देने यानी कि पर्यावरण अनुकूल जीवन जीने के लिए लोगों को प्रेरित करना इस मिशन का उद्देश्य है. पीएम मोदी ने इस मिशन को लाॅन्च किया था और अब वे इस मिशन को सफल बनाने में जुट गये हैं.

एनर्जी ट्रांजिशन की तरफ सरकार का फोकस

केंद्र सरकार ने सौर ऊर्जा और हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देने और एनर्जी ट्रांजिशन की तरफ बहुत फोकस किया है. 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन सरकार का लक्ष्य है ताकि इस धरती को बचाया जा सके और मानव का अस्तित्व इस धरती पर बना रहे.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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