PM Modi Address Nation: पीएम मोदी के संबोधन को लेकर उम्मीद की जा रही है कि वे महिला आरक्षण के कार्यान्वयन के मुद्दे और संसद में हुई घटनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे. विपक्षी दलों ने शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खिलाफ मतदान किया था. जिसके कारण विधेयक गिर गया.
बीजेपी ने काला दिन बताया, तो कांग्रेस ने सरकार पर राजनीति करने लगाया आरोप
महिला आरक्षण को 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में खारिज होने के बाद बीजेपी और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई. बीजेपी ने बिल खारिज होने को काला दिन बताया. कांग्रेस और विपक्षी दलों पर महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया. वहीं कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने कहा- सरकार इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है. 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून तुरंत लागू किया जाना चाहिए.
पीएम मोदी कब-कब देश को संबोधित कर चुके हैं
8 नवंबर, 2016 को पीएम मोदी ने नोटबंदी (Demonetization) की ऐतिहासिक घोषणा की थी.
19 मार्च, 2020 को पीएम मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था. उस समय कोरोना महामारी चरम पर था.
24 मार्च, 2020 को पीएम मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी. उस समय भी पीएम ने राष्ट्र को संबोधित किया था.
3 अप्रैल, 2020 कोरोना के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए दीये जलाने (9 मिनट) का आह्वान किया था.
14 अप्रैल, 2020 को पीएम मोदी ने लॉकडाउन विस्तार की घोषणा की थी.
12 मई, 2020 को पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा की थी.
7 जून, 2020 को पीएम मोदी ने कोरोना टीकाकरण (Vaccine) अभियान को लेकर देश को संबोधित किया था.
19 नवंबर, 2021 को पीएम मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी. उस समय भी उन्होंने देश को संबोधित किया था.
12 मई, 2025 को पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) और राष्ट्रीय सुरक्षा पर देश को संबोधित किया था.
क्या था संशोधन बिल में? कैसे लोकसभा में पास नहीं हो पाया
इस विधेयक के तहत 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को कार्यान्वित करने के लिए लोकसभा सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 तक किया जाना था. राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाई जानी थी. इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका. शुक्रवार रात लोकसभा में विधेयक पर हुए मतदान के दौरान 298 सदस्यों ने इसके समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया. मतदान करने वाले 528 सदस्यों में से, विधेयक को दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 के मतों की आवश्यकता थी.
