Parliament security : मनोरंजन पेशे से है इंजीनियर, सदमे में हैं पिता, कहा-देश विरोधी काम किया है तो सजा...

मनोरंजन के पिता देवराज गौड़ा का कहना है कि जो कुछ उनके बेटे ने किया वह उनके लिए अप्रत्याशित है. उसने कभी कोई देश विरोधी बात नहीं की और ना ही उसकी मानसिकता इस तरह की थी.

Parliament security breach : संसद पर हमले की बरसी के दिन संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले 34 साल के मनोरंजन डी इंजीनियर हैं. उनका नाम जब टीवी पर फ्लैश हुआ और अखबारों की सुर्खियां बना, तब से उनका परिवार सदमे में है. उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि कैसे उनका बेटा जो हमेशा किताबों में डूबा रहता था, उसने ऐसी हरकत कर दी.

मनोरंजन ने बेंगलुरू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की

मनोरंजन की उम्र 34 साल है और वो एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है, उसने बेंगलुरू से इंजीनियरिंग की है. लेकिन 13 दिसंबर को मनोरंजन डी ने देश के सबसे सुरक्षित और पवित्र माने जाने वाले लोकतंत्र के मंदिर में घुसपैठ की और वहां नारेबाजी करते हुए स्मोक क्रैकर चलाया. उसके परिजन इस घटना से बहुत परेशान हैं और उनका कहना है कि जो कुछ भी सोसाइटी के लिए अच्छा हो, वही किया जाना चाहिए.

मनोरंजन ने कभी देश विरोधी बात नहीं की

मनोरंजन के पिता देवराज गौड़ा का कहना है कि जो कुछ उनके बेटे ने किया वह उनके लिए अप्रत्याशित है. उसने कभी कोई देश विरोधी बात नहीं की और ना ही उसकी मानसिकता इस तरह की थी. कृषक देवराज गौड़ा का कहना है कि उनका पुत्र पुस्तकों में इतना तल्लीन रहता है कि उसने विवाह तक करने से इनकार कर दिया। वह महंगे वस्त्र धारण नहीं करता, केवल यात्रा पर ही धन व्यय करता है। इंजीनियरिंग पूरी करने के दस वर्षों बाद भी उसने कोई रोजगार नहीं अपनाया। अपने आगामी योजनाओं के विषय में वह कुछ नहीं बताता। मुझे बड़ी चिंता है और यदि उसने कोई भी राष्ट्र-विरोधी कृत्य किया हो, तो उसे कठोर दंड मिलना चाहिए.

मनोरंजन दिल्ली में है ये परिवार को पता नहीं था

मनोरंजन के पिता ने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनका बेटा दिल्ली गया हुआ है. जब कल संसद की खबरें टीवी पर फ्लैश होने लगीं, तो उन्हें अपने बेटे की कारगुजारियों के बारे में पता चला. मानसिक रूप से परेशान दिख रहे देवराज ने बताया कि मनोरंजन की शिक्षा को लेकर वे 15 साल पहले मैसूर के विजयनगर रहने के लिए आ गए थे.

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने मदद की थी

मनोरंजन ने मैसूर के संत जोसेफ काॅलेज से प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई की थी. उसके बाद बीआईटी मैसूर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. उसे इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए काॅलेज में सीट दिलवाने में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने मदद की थी. पिछले कुछ सालों से वह सोशल मीडिया ग्रुप में काफी सक्रिय रहता था. बावजूद इसके उसने कभी कोई ऐसी बात नहीं की, जिससे यह अनुमान लगाया जाए कि वह एंटी नेशनल गतिविधियों में शामिल है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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