Parliament: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है. ऐसी संभावना है कि विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को पारित किया जा सकता है. गुरुवार को संसद का बजट सत्र का समापन होना था. सरकार ने बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की बजाय सत्र को स्थगित कर दिया. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि बजट सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जायेगा और बहुत जल्द संसद के सदस्य फिर मिलेंगे. सरकार के पास कुछ महत्वपूर्ण विधेयक है और इसकी जानकारी विपक्ष को दी गयी है. अगले दो-तीन हफ्ते में सरकार महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सभापति सीपी राधाकृष्णन से पूछा कि सरकार सत्र के बारे में क्या सोच रही है. सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया जायेगा या बजट सत्र की कार्य अवधि का विस्तार होगा. इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विशेष उद्देश्य को देखते हुए दो-तीन हफ्ते बाद सत्र फिर शुरू होगा. इस पर विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार चुनाव में लाभ हासिल करने के लिए महिला आरक्षण विधेयक पारित कराना चाहती है.
कोई भी विधेयक विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण 29 अप्रैल के बाद पेश किया जाना चाहिए. इसपर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि इस बारे में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को पत्र लिख कर चर्चा की है. उन्होंने विपक्ष को राजनीति से हटकर सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार के पास समय कम है और इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है. सरकार ने महिलाओं से वादा किया है और उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए. सेकंड हाफ में जब राज्य सभा में कार्यवाही शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश ने सदन को 16 अप्रैल तक स्थगित करने की बात कही. यानी 16 अप्रैल को 11 बजे के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी.
भाजपा को चुनावी फायदा मिलने से आशंकित विपक्ष
विपक्ष को आशंका है कि चुनाव के बीच लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने के फैसले से भाजपा को चुनाव में फायदा हो सकता है. विपक्षी दलों की परेशानी यह है कि यदि वे इस विधेयक का विरोध करेंगे तो भाजपा चुनाव में विपक्षी दलों पर महिला विरोधी पार्टी होने का आरोप लगाकर सियासी लाभ उठाने की कोशिश करेगी. भाजपा का मानना है कि समर्थन और विरोध दोनों स्थिति में लाभ सत्ताधारी दल को होगा. इसका असर अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव पर भी पड़ना तय है, जहां विधानसभा चुनाव में आरक्षण लागू करने की तैयारी की जा रही है.विशेष सत्र के दौरान
महिला आरक्षण को लागू करने की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कर संशोधित विधेयक को पारित कराने की संभावना है. सरकार महिला आरक्षण को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में लागू करने की तैयारी में है. महिला आरक्षण विधेयक लागू होने पर लोकसभा में सीटों की संख्या 816 हो सकती है. दक्षिणी राज्यों के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार वर्ष 2011 के जनगणना के आधार पर राज्यों में लोकसभा की सीट बढ़ाएगी. दक्षिण के राज्यों का आरोप था कि दक्षिण के राज्यों ने आबादी नियंत्रण के लिए काफी काम किया है और नये जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या तय करने से संसद में दक्षिण राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी. ‘
