India DME Fuel LPG: भारत में रसोई गैस यानी LPG पर निर्भर करोड़ों परिवारों के लिए भविष्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. पुणे स्थित सीएसआईआर- नेशनल केमिकल लैबोरेटरी (CSIR-NCL) के वैज्ञानिक एक ऐसे स्वदेशी ईंधन पर काम कर रहे हैं, जिसे LPG का विकल्प माना जा रहा है. इस नए ईंधन का नाम DME यानी डाइमेथाइल ईथर है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक भारत को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती है और विदेशी ईंधन आयात पर निर्भरता घटा सकती है.
क्या है DME और क्यों है खास?
परियोजना से जुड़े एक वैज्ञानिक ने कहा कि यह एक और लैब एक्सपेरीमेंट की तरह नहीं है. यह भारत के नेक्स्ट जेनरेशन का डीप टेक नवाचार है. DME एक साफ और वैकल्पिक ईंधन है, जिसे कोयला, बायोमास और मेथनॉल जैसे घरेलू संसाधनों से तैयार किया जा सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे देश के अंदर ही बड़े स्तर पर बनाया जा सकता है. इससे LPG आयात पर होने वाला भारी खर्च कम हो सकता है.
LPG की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा DME
परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक टी राजा ने बताया कि DME और LPG के उपयोग में काफी समानता है. उन्होंने कहा कि DME को आसानी से LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन के मिश्रण के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी ऊष्मा क्षमता थोड़ी अलग जरूर है, लेकिन घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए यह प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है.
रसोई गैस से आगे भी हैं उपयोग
इस परियोजना से जुड़ी वैज्ञानिक समृद्धि माने ने बताया कि DME का इस्तेमाल केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि इसका उपयोग LPG आधारित ऑटो रिक्शा और कुछ मामलों में डीजल जनरेटर के विकल्प के रूप में भी किया जा सकता है.
शुरुआत में 20% ब्लेंडिंग का प्लान
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि LPG को पूरी तरह बदलने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी. शुरुआती चरण में 20 प्रतिशत DME और 80 प्रतिशत LPG का मिश्रण इस्तेमाल करने की योजना है. सबसे अहम बात यह है कि उपभोक्ताओं को इसके लिए नए सिलेंडर या गैस चूल्हे खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मौजूदा सिस्टम में ही इस मिश्रण का उपयोग संभव बताया जा रहा है.
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विदेशी मुद्रा बचाने में मिलेगी मदद
परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक आकाश भटकर ने कहा कि यदि भारत घरेलू LPG में 20 प्रतिशत DME मिश्रण का उपयोग शुरू करता है, तो इससे विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो सकता है. भारत हर साल लगभग 60-67 प्रतिशत LPG आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा का भारी खर्च होता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि DME इस खर्च को घटाने में मददगार साबित हो सकता है.
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युवा वैज्ञानिकों में उत्साह
इस परियोजना पर काम कर रहे युवा शोधकर्ताओं ने इसे देश के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया. प्रोजेक्ट एसोसिएट शीतल गवली ने कहा कि यह सिर्फ एक रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा काम है. वहीं शोधकर्ता अदिति कांबले ने बताया कि समय के साथ इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है ताकि इसका फायदा समाज तक पहुंच सके.
