DRDO Warning CBRN Threats: डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के वरिष्ठ वैज्ञानिक उपेंद्र कुमार सिंह ने रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक दौर से गुजर रही है और ऐसे में भारत समेत सभी देशों को अपनी सुरक्षा तैयारियां और मजबूत करनी होंगी.
नई दिल्ली में ‘CBRN Threats and Mitigation Measures- Strengthening India’s Preparedness through Government-Industry Collaboration’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक हालात बेहद अस्थिर हैं. उन्होंने कहा कि पुरानी वैश्विक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है और नई शक्ति संरचना उभर रही है, जिससे दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी है.
सिर्फ सैन्य ताकत नहीं, आर्थिक और तकनीकी युद्ध भी खतरा
DRDO वैज्ञानिक उपेंद्र सिंह ने कहा कि आज के दौर में युद्ध केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है. उन्होंने बताया कि आर्थिक दबाव, व्यापारिक प्रतिबंध, सांस्कृतिक हस्तक्षेप, साइबर गतिविधियां और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल भी किसी देश को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है. सिंह ने कहा कि आधुनिक संघर्षों में सैन्य शक्ति के साथ-साथ आर्थिक और तकनीकी ताकत भी अहम भूमिका निभा रही है.
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं पर भी जताई चिंता
उन्होंने कहा कि दुनिया की कई बड़ी संस्थाएं कमजोर होती दिखाई दे रही हैं. सिंह के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र (UN) में वैश्विक सहमति बनाना पहले की तुलना में कठिन हो गया है, जबकि NATO जैसे संगठन भी दबाव में नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौते और संधियां कई बार केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं.
परमाणु और जैविक जोखिमों का भी जिक्र
सम्मेलन के दौरान सिंह ने परमाणु और जैविक खतरों को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण परिस्थितियों में कुछ देश बड़े विनाशकारी हथियारों पर नियंत्रण खो सकते हैं. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान परमाणु भंडारण स्थल के पास हमले की आशंका ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया था. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने संभावित परिणामों का आकलन करने के लिए रातभर काम किया.
नए वायरस और स्वास्थ्य खतरों पर चिंता
उन्होंने हाल के वर्षों में सामने आए स्वास्थ्य खतरों का भी जिक्र किया. सिंह ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में एवियन फ्लू, इबोला, डेंगू और जीका वायरस जैसी बीमारियों ने चिंता बढ़ाई है. उन्होंने बताया कि हाल ही में एक क्रूज जहाज पर हंतावायरस के मामले सामने आए थे, जिसमें कुछ लोगों की मौत भी हुई. हालांकि यह वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलता था.
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भारत में ड्यूल-यूज टेक्नोलॉजी पर नजर
DRDO वैज्ञानिक ने कहा कि भारत सरकार ऐसी तकनीकों पर विशेष निगरानी रख रही है, जिनका इस्तेमाल सामान्य कार्यों के साथ-साथ हथियारों के निर्माण में भी किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड SCOMET ढांचे के तहत ऐसे उपकरणों और तकनीकों के निर्यात पर नजर रखता है. सिंह के मुताबिक, इस तरह की अनुमति और निगरानी से जुड़े मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
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इंटरनेट और डार्क वेब ने बढ़ाई चुनौती
उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डार्क वेब की वजह से आधुनिक तकनीकों तक पहुंच अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है. ऐसे में केवल नियम और अंतरराष्ट्रीय समझौते पर्याप्त नहीं हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि CBRN खतरे आज की वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का बेहद अहम हिस्सा बन चुके हैं और इनसे निपटने के लिए सरकार, उद्योग और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है.
