नोबेल शांति की रेस में भारत के 'पैडमैन', अरुणाचलम मुरुगनाथम हुए नॉमिनेट

Padman Arunachalam: सामाजिक उद्यमी अरुणाचलम मुरुगनाथम, जिन्हें दुनिया 'पैडमैन' के नाम से जानती है, को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया है.

Padman Arunachalam: नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किए जाने पर मुरुगनाथम ने कहा- शुरू में मुझे यकीन ही नहीं हुआ. उन्होंने आगे कहा- नोबेल पुरस्कार के लिए आप अपना नाम खुद नहीं भेज सकते, न ही आपके दोस्त या परिवार वाले भेज सकते हैं. यह किसी तीसरे पक्ष द्वारा ही भेजा जाना चाहिए. पुडुचेरी के अरविंद आई हॉस्पिटल के एक डीन और वहां काम कर रही अमेरिकी टीमों ने नोबेल के लिए मेरा नाम भेजा. 24 घंटे के अंदर ही इसे स्वीकार कर लिया गया. मुझे सच में बहुत गर्व है.

कौन हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम?

अरुणाचलम मुरुगनाथम तमिलनाडु के कोयंबटूर के एक सामाजिक उद्यमी हैं. सड़क हादसे में पिता की मौत के बाद मुरुगनाथम गरीबी में पले-बढ़े, जिस कारण से 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छुट गई. परिवार का भरण-पोषण के लिए उन्हें मजूदरी करनी पड़ी. कारखाने में काम करना पड़ा.

सस्ते सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन का आविष्कार

अरुणाचलम मुरुगनाथम ने समाज से लड़ते हुए सस्ते सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन का आविष्कार किया. उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी और ग्रामीण महिलाएं पीरियड्स के दौरान महंगे पैड न खरीद पाने के कारण गंदे कपड़े, राख या पत्तों का इस्तेमाल करती थीं, जिससे बीमारियां होने का खतरा रहता था. तब उन्होंने सस्ते सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन पर रिसर्च शुरू किया. लेकिन इसके लिए कोई भी महिला तैयार नहीं हुई. थक-हारकर उन्होंने खुद पर सैनिटरी पैड लागकर और कृत्रिम खून लगाकर पैड का टेस्ट किया. इस वजह से उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा. उन्हें पागल बोलकर पत्नी और मां ने छोड़ दिया. बाद में जब सफलता मिली तो मां और पत्नी वापस आ गईं.

अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन संघर्ष पर बनी फिल्म पैडमैन

अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन संघर्ष पर बॉलीवुड फिल्म पैडमैन बनी. जिसमें मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार थे. फिल्म को काफी सराहा गया.

अरुणाचलम मुरुगनाथम को सम्मान

अरुणाचलम मुरुगनाथम को साल 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया. 2014 में TIME मैजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया था. उनकी आविष्कार की गई मशीन से हजारों ग्रामिण महिलाओं को रोजगार मिल रहा है.

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By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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