Operation Sindoor: भारत आतंकवाद से लंबे समय से पीड़ित रहा है. लेकिन अब आतंकवाद के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. अब भारत आतंकी हमला होने पर सिर्फ कूटनीतिक बयान जारी नहीं करता है बल्कि सख्त कदम उठाता है. ऑपरेशन सिंदूर इसका उदाहरण है. पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के हमले के बाद भारत ने सख्त कार्रवाई करते हुए पाक स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला कर आतंकवाद के खिलाफ नीति को दुनिया के सामने साफ कर दिया. आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा को जायज ठहराने की कोशिश खतरनाक है. इससे आतंकवादियों को अपने लक्ष्य काे हासिल करने में मदद मिलती है. आतंकवाद सिर्फ राष्ट्रविरोधी काम नहीं है. इसके कई आयाम जैसे परिचालन, वैचारिक और राजनीतिक है और इससे निपटने के लिए सभी आयामों पर चोट करना जरूरी है.
भारत और पाकिस्तान दोनों एक साथ अलग राष्ट्र बने. आजादी के बाद भारत वैश्विक स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी(आईटी) के लिए पहचान बनाने में सफल रहा, जबकि पाकिस्तान की पहचान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद(आईटी) के तौर पर बनी है. गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक स्तर पर स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत आतंकी हमले होने की स्थिति में अब केवल कूटनीतिक बयान जारी नहीं करेगा, बल्कि सैन्य कार्रवाई करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर प्रतिबद्धता जाहिर करने का काम किया है. सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खतरे के खिलाफ सरकार के दृढ़ रुख का प्रदर्शन करता है.
भारत ने अपनी शर्तों पर रोका ऑपरेशन सिंदूर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों और खुद तय किए गए समय पर अंजाम दिया. इसे रोकने का काम भी अपनी शर्तों पर किया. ऑपरेशन के दौरान सिर्फ ऐसे ठिकानों पर हमला किया गया, जिन्होंने भारतीय नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का काम किया था. भारत लंबे संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार था. भारत ने परमाणु हमले की धमकी के आगे घुटने नहीं टेके और निर्धारित लक्ष्यों को हासिल किया. अब देश आतंकवाद और उसका समर्थन करने वालों में कोई अंतर नहीं करता है. ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ 72 घंटों में पूरा हो गया. इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए व्यापक तैयारी की गयी थी. इस ऑपरेशन से स्वदेशी हथियारों और रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर बढ़ी है. कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में दिलचस्पी दिखायी है. वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 62.66 फीसदी अधिक है. जर्मनी के हालिया दौरे का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख रक्षा कंपनियां भारत के निजी रक्षा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक है.
आधुनिक तकनीक बदल रहा है युद्ध का परिदृश्य
मौजूदा समय में साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग युद्ध के नये प्रतिमान स्थापित कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों में एआई का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया गया. इससे हमले की सटीकता और आक्रमण क्षमता काफी बढ़ गयी. एआई के प्रयोग से आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक जवाब देने में मदद मिली. आधुनिक युद्ध की जरूरत को देखते हुए सेना को प्रौद्योगिकी-संचालित और एकीकृत युद्धक मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है. भावी जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना ने ‘रुद्र’ ब्रिगेड, ‘भैरव’ बटालियन, ‘शक्तिबान’ तोपखाना रेजिमेंट और ‘दिव्यास्त्र’ बैटरी जैसी चुस्त और आत्मनिर्भर लड़ाकू इकाइयां स्थापित की हैं जो आधुनिक हाइब्रिड खतरों का तत्काल और सशक्त जवाब देने में सक्षम होगी. हालांकि एआई के खतरे भी हैं.
आधुनिक युद्ध में डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणाली गंभीर चुनौती भी है. अगर एआई नियंत्रण से बाहर हो जाए तो सुरक्षा के लिए बनाया गया उपकरण खुद के विनाश का हथियार बन सकता है. इन चुनौतियों पर गौर करना जरूरी है. एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा साइंस रक्षा बलों ने एआई-आधारित उभरती चुनौतियों के जवाब में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है. इस कार्यक्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित मौजूद रहे.
