दिल्ली में 3 दिनों तक ऑनलाइन ऑर्डर करके नहीं मंगाया जा सकेगा खाना, अमेजन - फ्लिपकार्ट की डिलीवरी भी बंद रहेगी

नई दिल्ली के सभी क्लाउड किचन, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, बाजार, खाद्य वितरण और वाणिज्यिक वितरण सेवाएं 8 से 10 सितंबर तक बंद रहेंगी. दिल्ली पुलिस की ओर से यह जानकारी भी दी गयी है कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के माध्यम से भी डिलीवरी किए जाने वाले ऑर्डर भी प्रतिबंधित रहेंगे.

G20 summit 2023 : अगर आप दिल्ली में रहते हैं और ऑनलाइन खाना मंगाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए काम की है. दिल्ली पुलिस ने घोषणा की है कि इस सप्ताह के जी20 शिखर सम्मेलन के कारण राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तीन दिनों के लिए ऑनलाइन ऑर्डर की डिलीवरी सहित अन्य कई सेवाओं पर प्रतिबंध रहेगा.

आठ से दस सितंबर तक बंद रहेंगी सेवाएं

दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात) एसएस यादव ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में यह जानकारी दी कि नई दिल्ली के सभी क्लाउड किचन, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, बाजार, खाद्य वितरण और वाणिज्यिक वितरण सेवाएं 8 से 10 सितंबर तक बंद रहेंगी. दिल्ली पुलिस की ओर से यह जानकारी भी दी गयी है कि कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के माध्यम से भी डिलीवरी किए जाने वाले ऑर्डर नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) क्षेत्र में प्रतिबंधित रहेंगे. हालांकि, एसएस यादव ने यह बताया कि आवश्यक चिकित्सा वस्तुओं की डिलीवरी सहित कुछ अन्य जरूरी सेवाओं को प्रतिबंधों से छूट दी गई है.

कुछ सेवाओं को मिलेगी छूट

जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए की गयी व्यवस्था के तहत कुछ अन्य सेवाओं में भी छूट दी गयी है, जिसमें लैब रिपोर्ट और नमूना संग्रह को पूरे शहर में अनुमति दी जाएगी. जिले में होटलों, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से जुड़े वाहन जो हाउसकीपिंग, खानपान, कचरा निपटान आदि में शामिल हैं, उन्हें वेरिफिकेशन के बाद अनुमति दी जाएगी.

भारत मंडपम में होगाआयोजन

ज्ञात हो कि जी20 समिट नौ और 10 सितंबर को प्रगति मैदान परिसर के नवनिर्मित भारत मंडपम अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी-कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है. इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ब्रिटेन के प्रधान मंत्री ऋषि सुनक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एवं कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी शामिल हो रहे हैं. भारत G20 बैठक का पहला दक्षिण एशियाई मेजबान है. जी-20 को सबसे बड़ा वैश्विक संगठन माना जाता है. इसके सदस्‍य देशों में भारत के अलावा फ्रांस, चीन, कनाडा, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, अमेरिका, यूके, तुर्की, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, रूस, मैक्सिको, जापान, इटली, इंडोनेशिया तथा 20वें सदस्य के तौर पर यूरोपीय संघ शामिल है.

हर साल आयोजित किया जाता है जी20 सम्मेलन

जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन हर साल होता है और हर साल सदस्य देशों में से कोई एक इस बैठक की अध्यक्षता करता है. पिछले साल ये बैठक इंडो‍नेशिया में हुई थी. उसके बाद इंडोनेशिया ने सम्मेलन की अध्‍यक्षता भारत को सौंपी. इस साल भारत इस समूह की मेजबानी कर रहा है. इसके बाद वो ब्राजील को ये जिम्‍मा सौंपेगा और अगले साल ये बैठक ब्राजील में आयोजित होगी. जी-20 का मूल उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग और वित्तीय स्थिरता कायम करना है. इसके अतिरिक्त जलवायु परिवर्तन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट, स्वास्थ्य एवं कृषि को भी इसके तहत शामिल किया गया है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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