Odisha Skeleton Case: सरकार की प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बैंक कर्मचारियों ने आदिवासी व्यक्ति के साथ बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त (RDC) को इस पूरी घटना की जांच के निर्देश दिए थे.
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
जांच के सिलसिले में गुरुवार को उत्तरी मंडल के राजस्व संभागीय आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा, क्योंझर जिलाधिकारी विशाल सिंह और अन्य अधिकारी ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा पहुंचे. अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की. महापात्रा ने कहा, प्रारंभिक जांच से स्पष्ट है कि बैंक की ओर से बड़ी चूक हुई है. इस अमानवीय घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
जीतू मुंडा को मिली आर्थिक सहायता
प्रशासनिक दखल के बाद जीतू मुंडा को उनकी दिवंगत बहन के खाते से 20 हजार रुपये मिल गए. इसके अतिरिक्त, ओडिशा सरकार ने उन्हें 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की है.
बैंक मैनेजर से दो बार मिल चुका था जीतू मुंडा, जांच में कई खुलासे
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जीतू मुंडा और उनकी बहन पहले भी कई बार बैंक से पैसे निकाल चुके थे. जीतू पूरी तरह अनपढ़ नहीं हैं, लेकिन उन्हें बैंकिंग की जटिल प्रक्रियाओं का ज्ञान नहीं था. सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि वह सुबह 11:26 से 11:58 तक बैंक में थे और इस दौरान उन्होंने दो बार मैनेजर से बात की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ और वे निराश होकर लौट गए.
क्या था मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विचलित करने वाले वीडियो में 50 वर्षीय जीतू मुंडा अपनी मृत बहन के कंकाल को कंधे पर रखकर बैंक पहुंचे थे. वे अपनी बहन के खाते से 20,000 रुपये निकालने गए थे. बैंक कर्मियों ने नियम का हवाला देते हुए खाताधारक को उपस्थित करने की शर्त रखी. जीतू ने बार-बार कहा कि उनकी बहन की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन कर्मचारी नहीं माने. अंततः मजबूर होकर जीतू श्मशान पहुंचे, कब्र खोदकर बहन का कंकाल निकाला और 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंच गए. बैंक के भीतर कंकाल देखते ही वहां हड़कंप मच गया.
