'सड़कें बनती रहेंगी चकाचक', नितिन गडकरी ने ली मंत्री पद की शपथ

नितिन गडकरी ने इस बार के चुनाव में नागपुर लोकसभा सीट से जीत की हैट्रिक लगाई है. इसके बाद उन्हें फिर एक बार मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया है. जानें उनके जीवन से जुड़ी खास बातें

नितिन गडकरी ने इस बार के चुनाव में जीत की हैट्रिक लगाई है. इस सीट से जीत के बाद उन्होंने कहा कि मैं लोगों के प्यार और विश्वास के कारण जीता हूं, नागपुर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा. गडकरी ने लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के विकास ठाकरे को एक लाख 37 हजार से अधिक मतों से पराजित कर नागपुर विधानसभा सीट जीत ली. नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भी उन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस और उससे संबंद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी से अपना सामाजिक-राजनीतिक सफर शुरू वाले नितिन गडकरी अपने काम के लिए पहचाने जाते हैं.

केंद्र में सड़क परिवहन मंत्रालय में अपने काम को इतनी कुशलता से किया कि लोगों के बीच नितिन गडकरी ‘‘फ्लाई ओवर मैन’’ एवं ‘रोडकरी’ के नाम से पहचाने जाते हैं. वह बीजेपी के उन चंद नेताओं में शामिल हैं जिनके दोस्त हर पार्टी में हैं. वे राजनीति से ऊपर उठकर देश सेवा में लगे रहते हैं, यही वजह कि विपक्ष के नेता भी उनकी तारीफ करने से परहेज नहीं करते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ़ माने जाने वाले नागपुर में नितिन गडकरी का जन्म हुआ और यहीं पले-बढ़े…उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक मंत्री रहते हुए सड़कों, राजमार्ग और बंदरगाहों समेत अवसंरचना के क्षेत्र में बहुत काम किया. उन्हें देश की अनेक विकास परियोजनाओं को तय लक्ष्य पर पूरा करने के लिए भी जाना जाता है.

जानें नितिन गडकरी से जुड़ी कुछ खास बातें

  • -महाराष्ट्र के नागपुर शहर में एक मध्यमवर्गीय कृषि परिवार में 1957 में जन्मे नितिन गडकरी बचपन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे.
  • -अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में छात्र नेता के रूप में काम करते हुए गडकरी ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की सदस्यता ली.
  • -नितिन गडकरी 1989 में महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य बने.
  • -नितिन गडकरी ने 1995 से 1999 तक महाराष्ट्र में लोक निर्माण विभाग मंत्री के रूप में काम किया. इस दौरान उन्होंने प्रदेश में राजमार्गों, खासकर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और अनेक फ्लाईओवर का निर्माण किया. इसके बाद राजनीतिक हलकों और जनता के बीच ‘फ्लाई ओवर मैन’ कहा जाने लगा.
  • -सड़कों के विकास के लिए उनके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के चलते शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने एक बार नितिन गडकरी को नितिन ‘रोडकरी’ कहकर संबोधित किया था.
  • -प्रधानमंत्री मोदी ने भी 2014 में सत्ता में आने के बाद गडकरी को सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी और वह अब भी इसी मंत्रालय को संभालने का काम कर रहे हैं.
  • -नितिन गडकरी 2009 तक महाराष्ट्र प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इसके बाद उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने का काम किया.
  • -पेशे से उद्योगपति नितिन गडकरी ने एम.कॉम, एलएलबी और डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट (डीबीएम) की डिग्री प्राप्त की हैं.
  • -अगस्त, 2022 में नितिन गडकरी को बीजेपी के नवगठित संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल नहीं किया गया था. इसके बाद विपक्ष के नेताओं ने कई तरह की बातें की थी.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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