धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- NEET परीक्षा की व्यवस्था में जो चूक हुई, उसकी हम जिम्मेदारी लेते हैं, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

NEET Re-Examination : अगले साल से नीट की परीक्षा CBT (कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट) मोड में होगी, यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दी. उन्होंने कहा कि परीक्षा की व्यवस्था में जो गलती हुई है, हम उसकी जिम्मेदारी लेते हैं.

NEET Re-Examination : धर्मेंद्र प्रधान ने नीट परीक्षा को लेकर शुक्रवार को मीडिया से बात की. प्रेस काॅन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि नीट री-एग्जाम की नई तारीखें 21 जून घोषित की गई हैं. उन्होंने कहा कि हम इस बार कोई गड़बड़ नहीं होने देंगे. हम सभी कैंडिडेट्स को लेकर बहुत दुखी और चिंतित हैं, लेकिन देश के हित में हमें एग्जाम कैंसिल करने का फैसला लेना पड़ा.

गैस पेपर की आड़ में पेपर लीक हुआ

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा 3 मई को हुई थी और 7 मई को एनटीए को शिकायत मिली कि गेस पेपर में कुछ ऐसे सवाल थे जो इस बार नीट की परीक्षा में पूछे गए थे. हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने तुरंत जांच शुरू की और इसे सरकारी एजेंसी को सौंप दिया. उन्होंने राज्य की एजेंसियों से संपर्क किया और 12 मई तक, हमें कंफर्म हो गया कि गेस पेपर की आड़ में, असली एग्जाम के सवाल लीक हो गए थे. इसी वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी. हमें पता है कि यह फैसला परीक्षार्थियों को दुख पहुंचाने वाला था, लेकिन हमने उनके हित में ही यह फैसला किया. हम नहीं चाहते थे कि कोई भी काबिल स्टूडेंट फ्रॉड कैंडिडेट या एजुकेशन माफिया की साजिश की वजह से अपने हक से वंचित रहे. पिछली बार सामने आई गड़बड़ियों के बाद, राधाकृष्णन कमेटी बनाई गई थी, और हमने 2025 और 2026 दोनों के लिए उसकी सिफारिशों को शब्दशः लागू किया. इसके बावजूद, यह घटना हुई, इसलिए परीक्षा रद्द करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि जो कुछ भी गलतियां हुईं हैं, उसके लिए सरकार जिम्मेदारी लेती है.

गलत कामों के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि गलत कामों के लिए हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है. हम एग्जाम माफिया के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं. कई सोशल मीडिया हैंडल गलत जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, सिस्टम को चुनौती दी जा रही है और इसे देखते हुए ही मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है. सीबीआई ने कार्रवाई शुरू कर दी है, जल्दी ही दोषियों को सामने लाया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनटीए एक ​​काबिल इंसान के हाथ में है. इसे सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर बनाया गया है और यह हर साल करीब 1 करोड़ स्टूडेंट्स का एग्जाम लेता है. हम यह पक्का करेंगे कि एनटीए से कोई गलती ना हो.

री-एग्जाम के लिए नहीं लिया जाएगा एग्जाम फीस

धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस काॅन्फ्रेंस में कहा कि जिस दिन परीक्षा रद्द हुई थी उसी दिन एनटीए ने स्टूडेंट्स की फीस वापस करने का ऐलान किया था. री-एग्जाम के लिए 0 फीस होगी. स्टूडेंट्स को एग्जाम सेंटर चुनने के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाएगा. स्टूडेंट्स की सुविधा और समय की कमी को ध्यान में रखते हुए, एनटीए ने परीक्षा का समय 15 मिनट बढ़ाने का फैसला किया है. परीक्षा, जो दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होनी थी, अब शाम 5.15 बजे तक चलेगी.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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