LPG की बड़ी खेप लेकर होर्मुज पार किया जग वसंत और पाइन गैस, दूर होगी गैस की किल्लत

LPG Tanker: जग वसंत और पाइन गैस नाम के दो भारतीय एलपीजी टैंकर 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं. इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है. दोनों पोतों पर 60 भारतीय नाविक सवार हैं.

LPG Tanker: दो भारतीय एलपीजी टैंकर जग वसंत और पाइन गैस अगले 48 घंटें में भारत पहुंच सकते हैं. दोनों ने स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पार कर लिया है. इन दोनों जहाजों में कुल 92,612.59 मीट्रिक टन एलपीजी लदा है. इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है. दोनों पोतों पर 60 भारतीय नाविक भी सवार हैं. पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए थे.

सभी भारतीय जहाज सुरक्षित- शिपिंग मिनिस्ट्री

शिपिंग मिनिस्ट्री के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि गल्फ रीजन में सभी भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा- पिछले 24 घंटों में किसी समुद्री घटना की कोई खबर नहीं है. दो एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. पाइन गैस में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी है और यह 27 मार्च की सुबह न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंच सकता है. वहीं, जग वसंत करीब 47,600 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर 26 मार्च को कांडला पोर्ट पर पहुंच सकता है. राजेश सिन्हा ने कहा कि फारस की खाड़ी से इन दोनों जहाजों के निकलने के बाद अब क्षेत्र में 20 भारतीय झंडे वाले जहाज हैं, जिन पर कुल 540 भारतीय नाविक सवार हैं.

20 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज में फंसे

युद्ध की शुरुआत के समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद थे. इनमें से 24 पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे. पिछले कुछ दिन में दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं. इससे पहले एलपीजी गैस लेकर इससे पहले एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं. भारतीय तेल टैंकर जग लाडकी और टैंकर जग प्रकाश भी सुरक्षित रूप से होर्मुज को पार कर गया था. वहीं, जग वसंत और पाइन गैस के होर्मुज पार कर जाने के बाद अब पश्चिमी तट पर भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 20 रह गयी है. इनमें पांच एलपीजी लदे टैंकर हैं.

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि पश्चिमी भाग में फंसे भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से मूल रूप से छह एलपीजी वाहक थे. एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क यानी थोक सामान की ढुलाई करने वाले हैं. इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और तीन नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं. उन्होंने बताया कि खाली जहाज में एलपीजी भर दी गई है. इससे खाना पकाने की गैस से भरे जहाजों की संख्या सात हो गई है.

तेल और गैस खरीदता है भारत

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है. युद्ध शुरू होने से पहले भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता था. इन क्षेत्रों से आने वाले जहाज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं. एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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