LPG crisis in India : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का भारत पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है. रसोई गैस की कमी की वजह से छोटे होटल के मालिक संकट में है. स्ट्रीट फूड बेचने वालों को भी गैस नहीं मिलने की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उनपर आश्रित श्रमिकों और हजारों स्टूडेंट्स को भी अपने घर वापस जाना पड़ रहा है. सूरत में प्रवासी मजदूर के तौर काम करने वाले कई लोग अपने गांव लौट रहे हैं. सूरत स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों की कतारें लगी हुई हैं.
बंद हो रही हैं कंपनियां, घर लौट रहे प्रवासी मजदूर
एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार सूरत रेलवे स्टेशन पर ऐसे लोगों की भीड़ जमा है, जो गैस की कमी की वजह से अपना काम छोड़कर गांव वापस जा रहे हैं. बिहार के एक श्रमिक सचिन ने बताया कि गैस की कमी की वजह से कंपनियां बंद हो रही हैं, जिसकी वजह से उनके पास पैसे नहीं हैं. भूखों मरने की नौबत है, ऐसे में क्या कर सकते हैं. वे अपने गांव वापस जा रहे हैं. जब गैस मिलने लगेगी तो वे वापस काम पर लौटेंगे. सचिन ने बताया कि कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया, पिछले एक सप्ताह से स्थिति काफी खराब हो गई है, इसलिए वे वापस अपने घर जा रहे हैं.
गैस की कमी की वजह से खाना बनाना मुश्किल
एक प्रवासी मजदूर सीमा देवी ने एएनआई को बताया कि पिछले 15 दिनों से गैस की संकट है. वे छोटे सिलेंडर में खाना बना रही थीं, लेकिन अब छोटा गैस भी नहीं मिल रहा है, ऐसे में यहां रहना मुश्किल है. मजदूरी करके जो 500–1000 रुपए मिलते हैं, उसपर भी आफत है, इसलिए अपने गांव लौट रहे हैं. अभी मेरे पति और दो बच्चे यहीं हैं, मैं अपनी बेटी के साथ वापस लौट रही हूं. गैस की कमी की वजह से मैं गोबर के उपले पर खाना बना रही थी. बहुत दिक्कत हो रही है.
जमीनी सच्चाई कुछ और , सरकार कह रही है स्थिति नियंत्रण में
सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि गैस की किल्लत देश में नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है, जबकि जमीनी सच्चाई कुछ और है. इसकी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई बाधित है. इसकी वजह से जितनी मांग देश में है, उतनी गैस की सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से गैस की किल्लत जमीनी स्तर पर तो दिख रही है.
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