वाल्मीकि घोटाले में घिरे बी नागेंद्र ने दिया मंत्री पद से इस्तीफा, ऐलान करते ही फूट-फूटकर रोए; बोले- मेरे दस्तखत किसी लेनदेन में नहीं

कर्नाटक की डीके शिवकुमार सरकार में मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. नागेंद्र पर वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित घोटाले में आरोप लगे थे. मामले को लेकर उन पर लगातार सवाल उठ रहे थे. इस्तीफा देने के बाद अब इस मुद्दे पर कर्नाटक की राजनीति और गरमा सकती है।

कर्नाटक के कांग्रेस नेता और मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार ( 28 अगस्त) को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. यह मामला महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में हुए एक कथित घोटाले से जुड़ा है. इस वजह से मंत्री जी पर इस्तीफे का बहुत दबाव था, क्योंकि उन पर एक आरोप लगा था.

89 करोड़ के कथित घोटाले का आरोप

बी नागेंद्र का इस्तीफा महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित 89 करोड़ रुपये के घोटाले के बीच आया है. इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और संबंधित नेताओं पर सवाल उठा रहा था. "हम इस मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं, क्योंकि जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है," कांग्रेस नेता ने कहा. घोटाले की जांच को लेकर भी दबाव बढ़ता जा रहा था. इस कथित घोटाले में 89 करोड़ रुपये की राशि का गलत इस्तेमाल हुआ है. आरोप है कि सरकारी पैसों का इस्तेमाल नियमों के विरुद्ध किया गया, जिसमें गबन और पैसे के लेन-देन में गड़बड़ी शामिल है. इसमें फंड का इस्तेमाल बिना सही इजाजत या प्रक्रियाओं का पालन किए हुए किया गया. हालांकि, घोटाले की प्रकृति और इस्तेमाल किए गए फंड के विशिष्ट प्रकारों का विवरण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, और न ही किसी आधिकारिक रिपोर्ट या ऑडिट का उल्लेख किया गया है.

मंत्री नागेंद्र का पक्ष: 'मेरे हस्ताक्षर किसी भी लेनदेन में नहीं हैं'

इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए बी नागेंद्र ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि किसी भी लेनदेन में उनके दस्तखत नहीं हैं. नागेंद्र ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से खुद को अलग बताया और कहा कि वह मामले में किसी तरह की गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार नहीं हैं. इस्तीफे का ऐलान करते समय नागेंद्र भावुक हो गए और बहुत रोए.

दो साल में दूसरी बार मंत्री पद से हटे

बी नागेंद्र करीब दो साल के कार्यकाल में दूसरी बार मंत्री पद से हटे हैं. वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित घोटाले ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भी राजनीतिक दबाव बढ़ाया है. नागेंद्र के इस्तीफे के बाद अब इस मामले की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.

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By सत्येन्द्र गिरि

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