जयराम रमेश ने नयी संसद को बताया 'मोदी मल्टीप्लेक्स', भड़की BJP, बोले जेपी नड्डा- कांग्रेस की दयनीय मानसिकता

Congress vs BJP: नये संसद भवन को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रही है. साथ ही बीजेपी की ओर से भी वार पर पलटवार किया जा रहा है. इसी कड़ी में कांग्रेस नेता रमेश ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि नए संसद भवन को मोदी मल्टीप्लेक्स या मोदी मैरियट कहा जाना चाहिए.

Congress vs BJP: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के ने एक बार फिर केन्द्र सरकार पर हमला किया है. जयराम रमेश ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर ट्वीट कर कहा कि नए संसद भवन को मोदी मल्टीप्लेक्स या मोदी मैरियट कहा जाना चाहिए. रमेश ने कहा कि 2024 में सत्ता परिवर्तन होने के बाद नए संसद का बेहतर उपयोग हो सकेगा. इधर, जयराम रमेश के ट्वीट पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी के निम्नतम मानकों के हिसाब से भी यह एक दयनीय मानसिकता है. यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं के अपमान के अलावा और कुछ नहीं है. नड्डा ने कहा कि वैसे भी यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस संसद विरोधी काम कर रही है.

कांग्रेस कर रही है केंद्र पर हमला
गौरतलब है कि नये संसद भवन को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रही है. साथ ही बीजेपी की ओर से भी वार पर पलटवार किया जा रहा है. इसी कड़ी में कांग्रेस नेता रमेश ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इतने प्रचार के साथ लॉन्च किया गया नया संसद भवन वास्तव में पीएम के उद्देश्यों को अच्छी तरह से साकार करता है. इसे मोदी मल्टीप्लेक्स या मोदी मैरियट कहा जाना चाहिए. रमेश ने कहा कि मैंने देखा कि दोनों सदनों के अंदर और लॉबी में बातचीत और बातचीत खत्म हो गई थी. यदि वास्तुकला लोकतंत्र को मार सकती है, तो संविधान को दोबारा लिखे बिना भी प्रधानमंत्री पहले ही सफल हो चुके हैं.

जयराम रमेश ने की नये और पुराने संसद भवन की तुलना
अपने ट्वीट में रमेश ने पुराने और नये संसद भवन की तुलना की है. रमेश ने कहा कि नये भवन में एक-दूसरे को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत होगी, क्योंकि हॉल बिल्कुल आरामदायक या कॉम्पैक्ट नहीं है. पुराने संसद भवन की न केवल एक विशेष आभा थी बल्कि यह बातचीत की सुविधा भी प्रदान करता था. सदनों, सेंट्रल हॉल और गलियारों के बीच चलना आसान था. यह नया संसद के संचालन को सफल बनाने के लिए आवश्यक जुड़ाव को कमजोर करता है. दोनों सदनों के बीच त्वरित समन्वय अब अत्यधिक बोझिल हो गया है. पुरानी इमारत में, यदि आप खो गए थे, तो आपको अपना रास्ता फिर से मिल जाएगा क्योंकि यह गोलाकार था. नई इमारत में, यदि आप रास्ता भूल जाते हैं, तो आप भूलभुलैया में खो जाते हैं. पुरानी इमारत आपको जगह और खुलेपन का एहसास देती है जबकि नई इमारत लगभग क्लौस्ट्रफ़ोबिक है.

जयराम रमेश ने गिनाईं नये संसद भवन की कमियां
रमेश ने कहा कि संसद में घूमने का आनंद गायब हो गया है. मैं पुरानी बिल्डिंग में जाने के लिए उत्सुक रहता था. नया कॉम्प्लेक्स दर्दनाक और पीड़ादायक है. मुझे यकीन है कि पार्टी लाइनों से परे मेरे कई सहकर्मी भी ऐसा ही महसूस करते हैं. मैंने सचिवालय के कर्मचारियों से यह भी सुना है कि नए भवन के डिजाइन में उन्हें अपना काम करने में मदद करने के लिए आवश्यक विभिन्न कार्यात्मकताओं पर विचार नहीं किया गया है. ऐसा तब होता है जब भवन का उपयोग करने वाले लोगों के साथ कोई परामर्श नहीं किया जाता है.


Also Read: मणिपुर: जमानत पर रिहा किए गए पांच युवकों में से एक फिर गिरफ्तार, सरकार ने दिया यह अल्टीमेटम

64500 वर्ग मीटर फैला है नया संसद भवन
गौरतलब है कि नये संसद भवन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया था. इस दौरान भव्य समारोह का आयोजन किया गया था. हालांकि कांग्रेस सहित 20 विपक्षी पार्टियों ने समारोह का बहिष्कार किया था. बता दें, त्रिभुजाकार वाले चार मंजिला संसद भवन का निर्मित क्षेत्र 64500 वर्ग मीटर है. भवन के तीन मुख्य द्वार हैं- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार. इसमें वीआईपी (अति विशिष्ट व्यक्तियों), सांसदों और आगंतुकों के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार हैं.नये संसद भवन के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई है. इसमें प्रयुक्त सागौन की लकड़ी महाराष्ट्र के नागपुर से लाई गई है, जबकि लाल और सफेद बलुआ पत्थर राजस्थान के सरमथुरा से लाया गया है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >