ISI Honeytrap in India: दिल्ली में शुक्रवार को एक यंग कपल की गिरफ्तारी के बाद भारत में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के जासूसी नेटवर्क एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, हाल के मामलों को करीब से देखने पर पता चलता है कि जासूसी का यह नेटवर्क प्लान्ड वे में काम कर रहा है. इसमें सोशल मीडिया के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाना, हनीट्रैप के जरिए करीबियां बढ़ाना और फिर भारत की रक्षा व्यवस्था से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाना शामिल है. जांच में सामने आए मामलों में इन तीन तरीकों की समानता साफ तौर पर दिखाई देती है.
जासूसी के आरोप में नवविवाहित जोड़ा पकड़ा गया
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक जासूसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए एक नवविवाहित जोड़े (न्यू मैरिड कपल) को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, दोनों 2024 से सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में थे. आरोप है कि वे संवेदनशील जानकारी शेयर कर रहे थे. साथ ही, उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में सैन्य छावनी वाले इलाकों की रेकी के लिए लोगों को जोड़ने का काम भी सौंपा गया था.
टारगेट खोजने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल
माना जा रहा है कि पाकिस्तान के एजेंट सोशल मीडिया पर भारतीयों की प्रोफाइल खंगालकर अपने निशाने चुनते हैं. उनकी नजर खास तौर पर वर्दी में नजर आने वाले रक्षा या सरकारी कर्मचारियों पर रहती है. इसके अलावा ऐसे आम लोगों को भी निशाना बनाया जाता है, जिन्हें किसी तरह की परेशानी या कमजोरी के दौर से गुजरता हुआ समझा जाता है. इसके बाद उन्हें सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है.
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निशाना तय होने के बाद पाकिस्तानी एजेंट आमतौर पर भारतीय सिम कार्ड से चलने वाले सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए उनसे संपर्क करते हैं. महिलाओं की तस्वीरों वाले अकाउंट से दोस्ती की शुरुआत होती है, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत निजी तस्वीरों तक पहुंच जाती है. इसके बाद इन तस्वीरों के जरिए लोगों को ब्लैकमेल कर संवेदनशील जानकारी हासिल करने या जासूसी में मदद करने के लिए दबाव बनाया जाता है.
हनीट्रैप पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का एक खास तरीका
भारतीय रक्षा या सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाने के लिए हनीट्रैप पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का एक प्रमुख तरीका माना जाता है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस ऐसे कई जासूसी प्रयासों को समय रहते नाकाम कर देती हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ अधिकारी इस जाल में फंस जाते हैं. इस साल मई में गिरफ्तार किए गए भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर पर आरोप है कि वह हनीट्रैप का शिकार होने के बाद पाकिस्तानी एजेंटों को संवेदनशील जानकारी दे रहा था.
