जेल में इमरान खान के साथ हो रहा है ऐसा बर्ताव! जानें किस हाल में हैं पाकिस्तान के पूर्व पीएम

इमरान खान की कानूनी टीम को अटक जेल के अधीक्षक तथा पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से की गयी अपीलों के बावजूद आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए उनसे मुलाकात करने नहीं दिया जा रहा है. जानें पीटीआई ने क्या लगाया आरोप

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना मामले में दोषी पाये जाने और तीन साल जेल की सजा सुनाये जाने के बाद शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया. लाहौर पुलिस ने पूर्व पीएम को उनके जमान पार्क स्थित घर से गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें लाहौर की कोट लखपत जेल में रखा गया, जहां से सड़क मार्ग से अटोक शहर स्थित अटोक जेल ले जाया गया. आपको बात दें कि यह वही जेल है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा अपदस्थ किये जाने पर गिरफ्तारी के बाद रखा गया था.

इस बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने रविवार को आरोप लगाया कि प्राधिकारी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कानूनी टीम को अदालत से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए उनसे मुलाकात नहीं करने दे रहे हैं. पीटीआई प्रमुख खान सरकारी तोहफों की बिक्री को छिपाने के जुर्म में अटक जेल में बंद हैं जहां उनकी बीती रात कटी. इस्लामाबाद में एक सत्र अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया.

इमरान खान की गिरफ्तारी को ‘‘अपहरण’’ बताया गया

पार्टी ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप पर शेयर किये बयान में इमरान खान की गिरफ्तारी को ‘‘अपहरण’’ बताया गया है. बयान में कहा गया है कि अध्यक्ष की कानूनी टीम को अटक जेल के अधीक्षक तथा पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से की गयी अपीलों के बावजूद आवश्यक कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के लिए उनसे मुलाकात करने नहीं दिया जा रहा है. यह गिरफ्तारी की तरह नहीं बल्कि अपहरण की तरह लगता है. पूर्व पीएम खान को लाहौर में उनके जमान पार्क आवास से गिरफ्तार किया गया और पंजाब के आखिरी बड़े शहर अटक तक सड़क मार्ग से ले जाया गया. इस शहर की सीमा खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत से लगती है.

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शुरुआत में ऐसी उम्मीद थी कि इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल में रखा जाएगा लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें अटक ले जाया गया. खान की गिरफ्तारी के बाद सड़कों पर उनके समर्थन नहीं उतरे जैसा कि नौ मई को उनकी गिरफ्तारी के वक्त देखा गया था. तब हजारों समर्थकों ने प्रदर्शन किया था. इमरान खान की अनुपस्थिति में पीटीआई का नेतृत्व कर रहे शाह महमूद कुरैशी ने एक वीडियो संदेश में कार्यकर्ताओं से सड़कों पर उतरने लेकिन शांति बनाए रखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हमारा अधिकार है लेकिन कोई सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाया जाए। कानून अपने हाथ में न लें.

पाक के पूर्व पीएम इमरान खान का संदेश

पाक के पूर्व पीएम इमरान खान ने पहले से रिकॉर्ड एक वीडियो में भी ऐसा ही संदेश दिया है जिसे पार्टी ने अपने सोशल मीडिया मंचों पर पोस्ट किया है लेकिन इस बार समर्थकों की प्रतिक्रिया इतनी उत्साहपूर्ण नहीं है. कुरैशी ने खान की दोषसिद्धि से निपटने की रणनीति बनाने के लिए पीटीआई की कोर समिति की एक बैठक बुलायी है लेकिन उनके पास विकल्प सीमित हैं. कई लोगों का मानना है कि सत्र अदालत ने जल्दबाजी में फैसला दिया है क्योंकि इस मामले में एक अपील अभी इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है. साथ ही अदालत ने मामले के सुनवाई योग्य होने के मुद्दे पर पीटीआई के वकीलों की दलीलें सुने बिना फैसला दिया. खान फैसले को उच्च न्यायालय तथा फिर उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं.

कैसे हुआ करोड़ों का भ्रष्टाचार

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या दूसरे पद पर रहने वालों को मिले तोहफों को तोशाखाना में जमा कराना होता है. यदि तोहफा 10 हजार पाकिस्तानी रुपये की कीमत वाला होता है, तो बिना पैसा चुकाये संबंधित व्यक्ति इसे रखने का अधिकारी होता है. यदि चार लाख से ज्यादा का तोहफा है, तो इसे सिर्फ प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ही खरीद सकते हैं. यदि कोई नहीं खरीदता, तो नीलामी होती है. इमरान ने यहीं पर खेल कर दिया. दो करोड़ के तोहफे को पांच लाख का बता कर खरीदा और फिर वास्तविक कीमत से भी कई गुना ज्यादा पर बेचने का काम किया. बाद में इमरान ने चुनाव आयोग को बताया था कि उन्होंने तोशाखाने से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपये में खरीदा था, बेचने पर उन्हें 5.8 करोड़ रुपये मिले थे. बाद में खुलासा हुआ कि यह रकम 20 करोड़ से ज्यादा थी.

भाषा इनपुट के साथ

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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