उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ दिखाई देने लगा है. ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया है. तेज बहाव और लगातार बढ़ते पानी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हालात को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है.
SDRF, जल पुलिस और आपदा राहत टीम ने संभाला मोर्चा
गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), जल पुलिस और आपदा राहत बल की संयुक्त टीमें त्रिवेणी घाट, मुनि की रेती और लक्ष्मण झूला क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही हैं. लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को घाट खाली करने और गंगा में उतरने से बचने की चेतावनी दी जा रही है. अधिकारियों ने कहा कि ऊपरी इलाकों में लगातार बारिश होने से नदी का बहाव बेहद तेज और खतरनाक हो गया है.
उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण राज्य में 1,869 सड़कें बंद हो गई थीं, जिनमें से अधिकांश को खोल दिया गया है. फिलहाल करीब 150 मार्ग अभी भी बाधित हैं. प्रशासन के अनुसार, चारधाम यात्रा सामान्य रूप से जारी है, हालांकि जहां मौसम का खतरा अधिक है वहां यात्रियों की आवाजाही को अस्थायी रूप से नियंत्रित किया जा रहा है. वहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा के छह दल सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि सातवां दल फिलहाल चीन में है.
गंगा में स्नान पर रोक, राहत दल पूरी तरह तैयार
आपदा राहत विभाग के अतिरिक्त उपनिरीक्षक बिशन सिंह कड़का ने बताया कि बुधवार रात से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण सुबह से ही गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा. उन्होंने कहा कि किसी भी श्रद्धालु को गंगा में स्नान नहीं करने दिया जा रहा है. वहीं SDRF के एएसआई महावीर चौहान ने बताया कि सभी टीमें आधुनिक बचाव उपकरणों के साथ तैनात हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
कई नदियां खतरे के निशान के करीब, ऑरेंज अलर्ट जारी
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि देहरादून, बागेश्वर और चमोली में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी-टिहरी और उत्तरकाशी के लिए भी तीन घंटे का ऑरेंज अलर्ट लागू है. अलकनंदा, भागीरथी, मंदाकिनी, गंगा, यमुना और शारदा जैसी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है.
भूकंप निगरानी के लिए जोशीमठ में बनेगी नई वेधशाला
बारिश और बाढ़ के खतरे के बीच उत्तराखंड सरकार ने भूकंप की बेहतर निगरानी के लिए भी बड़ा कदम उठाया है. आपदा प्रबंधन विभाग ने जोशीमठ में भूकंपीय वेधशाला स्थापित करने का फैसला लिया है. इसके लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी. इस परियोजना से हिमालयी क्षेत्र में भूकंप संबंधी निगरानी और वैज्ञानिक शोध को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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