विजय माल्या, नीरव मोदी और ललित मोदी जैसे कई आरोपी भारत में आर्थिक अपराध करने के बाद विदेश चले गए. ऐसे लोगों को वापस लाने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती है. इसमें कानूनी लड़ाई, प्रत्यर्पण संधि, पुख्ता सबूत और संबंधित देश की मंजूरी जैसी कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं.
आर्थिक अपराधियों के साथ-साथ मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और दूसरे गंभीर मामलों से जुड़े आरोपी भी विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपते रहे हैं. केंद्र सरकार अब ऐसे भगोड़ों के खिलाफ तकनीक, खुफिया सूचनाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मदद से कार्रवाई तेज कर रही है.
36 देशों से 274 भगोड़े वापस लाए गए
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है. पिछले तीन वर्षों के दौरान 401 भगोड़ों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किए गए. साल 2014 से पहले औसतन हर साल केवल चार भगोड़ों को भारत लाया जा रहा था. उस समय प्रत्यर्पण के करीब 110 आवेदन लंबित थे. वर्ष 2014 से पहले भारत की केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि थी. आर्थिक भगोड़ों की संपत्ति जब्त करने के लिए भी कोई अलग और प्रभावी कानून नहीं था.
ऑपरेशन त्रिशूल और नए कानूनों से कार्रवाई तेज
भगोड़े आर्थिक अपराधियों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए केंद्र सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू किया. इसके साथ ही विदेशों में छिपे आरोपियों का पता लगाने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल भी शुरू किया गया. इस अभियान के तहत नाम और पहचान बदलकर विदेशों में रह रहे आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट और जियो-लोकेशन ट्रैकिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. सरकार ने इसके लिए खुफिया सूचनाओं और आधुनिक तकनीक पर आधारित एकीकृत व्यवस्था तैयार की है.
भगोड़ों की तलाश में इन माध्यमों का इस्तेमाल
- सैटेलाइट और जियो-लोकेशन ट्रैकिंग
- डिजिटल और सोशल मीडिया फुटप्रिंट
- अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों से सहयोग
- रेड कॉर्नर नोटिस और प्रत्यर्पण अनुरोध
- बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच
कैसे मिली कामयाबी
विदेश भाग चुके आरोपियों को भारत वापस लाने के लिए सख्त कानूनों के साथ अलग-अलग स्तरों पर लगातार प्रयास जरूरी होते हैं. केंद्र सरकार ने साल 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लागू कर इस प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाया. इसके अलावा कई देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां और समझौते किए गए.
साल 2024 में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों में भी विदेश भागे आरोपियों से संबंधित विशेष प्रावधान शामिल किए गए. पहली बार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 355 और 356 में फरार आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने यानी ट्रायल इन एब्सेंटिया का प्रावधान किया गया.
32 मामलों की जांच कर रही ईडी, नौ आरोपी भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित
नई दिल्ली में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय बैंक धोखाधड़ी के 32 मामलों की जांच कर रहा है. इन मामलों में शामिल 54 आरोपी देश छोड़कर फरार हो चुके हैं. इन आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत कार्रवाई करने और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की गई है. अब तक नौ आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है. उनकी 840.68 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है. वहीं, 18 आरोपियों के प्रत्यर्पण की कार्रवाई चल रही है. इन आरोपियों से जुड़ी 35,166.28 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की गई है.
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