गांवों में गाय-भैंस का गोबर, फसल अवशेष और दूसरे जैविक कचरे को अक्सर बेकार समझ लिया जाता है. लेकिन भारत सरकार अब इन्हीं संसाधनों को बायोगैस, कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद में बदलकर ग्रामीण आय और रोजगार का जरिया बनाने पर जोर दे रही है. 6 अगस्त 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने GOBARdhan की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना को मंजूरी दी है. इसरकार ने इस योजना के लिए 23,731 करोड़ रुपये का बजट रखा है. यह योजना 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी.
GOBARdhan योजना क्या है?
GOBARdhan यानी Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan. इसकी शुरुआत 2018 में गांवों के जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने के उद्देश्य से हुई थी. इसके तहत पशुओं का गोबर, रसोई का जैविक कचरा, फसल अवशेष और बाजार से निकलने वाला जैविक कचरा बायोगैस और बायो-स्लरी में बदला जा सकता है.
अब 2026 में मंजूर नई राष्ट्रीय योजना ने खास तौर पर CBG सेक्टर को बड़े स्तर पर विकसित करने का ढांचा तैयार किया है. सरकार का लक्ष्य घरेलू CBG उत्पादन को करीब 10 गुना बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निजी निवेश जुटाना है.
किसान के लिए कौन सा कचरा उपयोगी है?
योजना के तहत इस्तेमाल होने वाले प्रमुख जैविक संसाधनों में शामिल हैं:
- गाय-भैंस का गोबर
- फसल अवशेष और कृषि कचरा
- प्रेस मड यानी चीनी उद्योग से निकलने वाला जैविक अवशेष
- नगर निकायों का जैविक कचरा
- रसोई और बाजार से निकलने वाला जैविक कचरा
- अन्य उपयुक्त बायोमास संसाधन
इनसे बायोगैस/CBG के साथ जैविक खाद और बायो-स्लरी भी तैयार होती है.
CBG कैसे कमाई का जरिया बन सकता है?
बड़े स्तर पर स्थापित प्लांट में जैविक कचरे को पहले बायोगैस में बदला जाता है. इसके बाद गैस को शुद्ध और संपीड़ित करके CBG तैयार किया जाता है. नई GOBARdhan व्यवस्था में सरकार ने CBG के लिए स्थिर कीमत, सुनिश्चित मांग, पूंजी सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और क्रेडिट सपोर्ट जैसे उपाय रखे हैं.
सरकार के अनुसार, योजना के तहत पात्र ग्रीनफील्ड CBG परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक 2 करोड़ रुपये तक की पूंजी सहायता मिल सकती है. ब्राउनफील्ड परियोजनाओं के विस्तार को भी सहायता के दायरे में रखा गया है.
इसका मतलब यह नहीं है कि हर किसान को सीधे 2 करोड़ रुपये मिलेंगे. पूंजी सहायता पात्र CBG परियोजनाओं के लिए है, इसलिए किसान को परियोजना की पात्रता, क्षमता, तकनीक, वित्तीय मॉडल और संबंधित विभाग के नियमों की जांच करनी होगी.
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जैविक खाद से भी कमाई का मौका
CBG प्लांट में गोबर और दूसरे जैविक कचरे से गैस बनाने के बाद जैविक खाद भी तैयार होती है. इसमें FOM (Fermented Organic Manure) और LFOM (Liquid Fermented Organic Manure) जैसी खाद शामिल हैं. सरकार इन खादों के उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए भी व्यवस्था कर रही है. इसके लिए GOBARdhan पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी हो सकता है.
किसान या ग्रामीण उद्यमी सिर्फ गोबर बेचकर ही नहीं, बल्कि गोबर और जैविक कचरा इकट्ठा करने, CBG या बायोगैस प्लांट के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने और जैविक खाद तैयार करने या बेचने जैसे कामों से भी जुड़ सकते हैं. हालांकि, किस काम के लिए कितनी सरकारी मदद मिलेगी और उसके लिए क्या पात्रता होगी, यह संबंधित योजना और नियमों पर निर्भर करेगा.
किसान या ग्रामीण उद्यमी जानकारी कहां से लें?
सबसे पहले आधिकारिक GOBARdhan पोर्टल पर अपने राज्य और जिले में मौजूद परियोजनाओं की जानकारी देखी जा सकती है. पोर्टल पर बायोगैस और CBG/Bio-CNG प्लांट की स्थिति भी उपलब्ध है.
बायोगैस प्लांट के लिए सरकार के GOBARdhan पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा है. पोर्टल के अनुसार, सरकारी या निजी संस्था जो बायोगैस प्लांट चला रही है या स्थापित करना चाहती है, वह आवेदन कर सकती है.
CBG से जुड़ी जानकारी के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) की व्यवस्था देखना जरूरी है, क्योंकि नई राष्ट्रीय योजना के तहत MoPNG इसका नोडल मंत्रालय है.
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ध्यान रखने योग्य बातें
GOBARdhan को केवल 'गोबर बेचकर पैसा कमाने की योजना' समझना सही नहीं होगा. यह जैविक कचरे से ऊर्जा और जैविक खाद तैयार करने वाला व्यापक ढांचा है. किसान के लिए असली अवसर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसके इलाके में पर्याप्त कच्चा माल, प्लांट, बाजार, परिवहन और सरकारी सहायता की क्या व्यवस्था है.
सबसे जरूरी कदम है कि किसी एजेंट या निजी कंपनी को पैसा देने से पहले अपने जिले के संबंधित विभाग/ग्राम पंचायत, राज्य की नोडल एजेंसी और आधिकारिक GOBARdhan पोर्टल से पात्रता और उपलब्ध सहायता की पुष्टि करें.
