Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में ग्राम कॉमन्स को नई पहचान, विशेषज्ञों ने बताया ग्रामीण विकास के लिए निर्णायक

Economic Survey: केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने टिकाऊ ग्रामीण विकास, मजबूत आजीविका और जलवायु लचीलेपन की नींव के रूप में ग्राम कॉमन्स (विलेज कॉमन्स) के पुनरुद्धार पर विशेष जोर दिया है. रविवार को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले जारी इस सर्वेक्षण में ग्राम कॉमन्स को एक अलग भूमि-उपयोग श्रेणी के रूप में औपचारिक मान्यता देने की सिफारिश की गई है.

Economic Survey: केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने टिकाऊ ग्रामीण विकास, मजबूत आजीविका और जलवायु लचीलेपन की नींव के रूप में ग्राम कॉमन्स (विलेज कॉमन्स) के पुनरुद्धार पर विशेष ज़ोर दिया है. रविवार को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले जारी इस सर्वेक्षण में ग्राम कॉमन्स को एक अलग भूमि-उपयोग श्रेणी के रूप में औपचारिक मान्यता देने की सिफारिश की गई है. सर्वेक्षण में कहा गया है कि ग्रामीण कॉमन्स के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सरकार और स्थानीय समुदायों की साझी भागीदारी अनिवार्य है. दस्तावेज़ के अनुसार, ‘विलेज कॉमन्स’ को उप-श्रेणियों के साथ भूमि रिकॉर्ड में शामिल करने से इनके सटीक आकलन, निगरानी और प्रभावी नीति निर्माण में मदद मिलेगी.

“ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रगति

भागीदारी से साझेदारी तक” शीर्षक अध्याय में ग्राम कॉमन्स को सामान्य संपत्ति संसाधन (सीपीआर) बताया गया है. इसमें चराई भूमि, तालाब, जल निकाय और पारंपरिक रूप से समुदायों द्वारा प्रबंधित साझा स्थान शामिल हैं. सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा ग्राम कॉमन्स है. 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में करीब 6.6 करोड़ हेक्टेयर आम भूमि है, जो लगभग 35 करोड़ ग्रामीण लोगों की आजीविका का आधार है. ये कॉमन्स भोजन, चारा, ईंधन, पानी और आय सहित 34 प्रकार की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करते हैं और जल शोधन, मिट्टी संरक्षण, कार्बन संधारण व बाढ़ नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते हैं. इसके बावजूद, अतिक्रमण और दुरुपयोग के कारण इनका मूल्य अक्सर कम करके आंका गया है.

वाटरलू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शिशिर के प्रधान का कहना है कि यह पहला अवसर है जब आर्थिक सर्वेक्षण ने ग्राम कॉमन्स को केवल सांस्कृतिक या निर्वाह के संसाधन के बजाय एक महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति के रूप में देखा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे योजना और बजटीय ढांचे में ग्राम कॉमन्स को केंद्र में रखा जाएगा. अर्थशास्त्री और एनआरएम विशेषज्ञ प्रवास मिश्रा ने कहा कि ग्राम कॉमन्स बंजर भूमि नहीं बल्कि महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और आर्थिक संसाधन हैं. उन्होंने पंचायतवार कॉमन्स सूची तैयार करने और जीआईएस मैपिंग के ज़रिए इनके सतत उपयोग पर ज़ोर दिया.

शोधकर्ता कंची कोहली के अनुसार, ग्राम कॉमन्स की औपचारिक मान्यता के साथ यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक मूल्य सुरक्षित रहें. वहीं, पूर्व आईएएस अधिकारी ऑरोबिनोव बेहेरा ने कहा कि कानूनों के बेहतर क्रियान्वयन और समुदायों को वास्तविक अधिकार दिए बिना कॉमन्स का संरक्षण संभव नहीं होगा. कुल मिलाकर, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 यह स्पष्ट संकेत देता है कि ग्राम कॉमन्स का पुनरुद्धार एक समावेशी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण की कुंजी है.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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