Earthquake : दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटके, नेपाल में था केंद्र, 30 मिनट में दो बार डोली धरती

भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 बताई जा रही है. भूकंप के झटके इतने जोरदार थे कि बिस्तर और कुर्सियों पर बैठे लोग हिल गए. अपार्टमेंट और घरों से भाग कर लोग खुलीे जगह पर पहुंच गए हैं.

Earthquake tremors in Delhi-NCR : दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप का केंद्र नेपाल में था. भूकंप दिल्ली एनसीआर में भूकंप के झटके 2 :45 बजे के आसपास महसूस किए गए. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 बताई जा रही है. भूकंप के झटके इतने जोरदार थे कि बिस्तर और कुर्सियों पर बैठे लोग हिल गए. अपार्टमेंट और घरों से भाग कर लोग खुलीे जगह पर पहुंच गए हैं. जानकारी के अनुसार भूकंप के झटके पूरे उत्तर भारत में महसूस किए गए हैं. लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भूकंप के तेज झटके लोगों ने महसूस किए.


नेपाल में भूकंप का केंद्र

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार दोपहर लगभग 2: 51 बजे नेपाल में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.2 थी. नेपाल के कांडा में भूकंप का केंद्र था. यहां 30 मिनट में दो बार धरती हिली. उत्तराखंड में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद लोग दहशत में आ गए और घरों से निकल कर खुली जगह में आ गए.

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जयपुर में भी धरती डोली

जयपुर में भी धरती डोली है. दोपहर करीब दो बजकर 55 मिनट पर लोगों को भूकंप के झटके महसूस हुए और लोग घबराकर इमारतों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए. पुलिस नियंत्रण कक्ष ने बताया कि जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है.

असम में भी दिखा भूकंप का असर

National Center for Seismology के अनुसार असम में भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3 .0 की थी. नेपाल के कांडा में जहां इसका केंद्र था, वहां भूकंप का केंद्र जमीन से 10 किलोमीटर नीचे था. वहीं हरियाणा के कई इलाकों में तीव्रता 2.0 की थी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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