सुप्रीम कोर्ट ने सत्य निकेतन इमारत हादसे की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट को जारी रखने को कहा है. हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि 12 लोग घायल हुए थे. कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से अब तक उठाए गए कदमों का भी जायजा लिया. ये कदम दिल्ली और लखनऊ में पहले हुए इमारत गिरने और आग लगने के हादसों के बाद दिए गए आदेशों के तहत उठाए जा रहे हैं.
दिल्ली के मोती बाग के पास सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कई जरूरी आदेश दिए. कोर्ट ने एमसीडी को पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा की जांच करने और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा.
अदालत की मदद के लिए नियुक्त वरिष्ठ वकील अजीत कुमार ने कहा कि इस मामले में हो रहा काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं लगना चाहिए कि दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही पूरी सुनवाई सिर्फ पीजी की सुरक्षा तक ही सीमित है.
वरिष्ठ वकील अजीत कुमार ने बताया कि दिल्ली के चार इलाकों और लखनऊ में जांच की जा चुकी है. पहले दिए गए आदेश के तहत दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत, मालवीय नगर और सरोजिनी नगर के साथ लखनऊ के अलीगंज इलाके में भी जांच की गई.
सत्य निकेतन हादसे पर SC में सुझाव
अजीत कुमार ने सुझाव दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा मामला सुप्रीम कोर्ट में लाकर इस मामले के साथ जोड़ दिया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक समय-समय पर अपनी रिपोर्ट भेजी जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने अजीत कुमार के सुझाव को मान लिया. कोर्ट ने कहा कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में कोई बदलाव नहीं करना चाहता. हाईकोर्ट को मामले की निगरानी करते हुए इसे जल्द पूरा करने को कहा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसकी मौजूदा सुनवाई सिर्फ दिल्ली के कुछ इलाकों या लखनऊ तक सीमित नहीं है.
