Defence: भारतीय नौसेना को जल्द ही आधुनिक स्टील्थ युद्धपोत तारागिरी(एफ 41) मिलने वाला है. यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17 ए के तहत स्वदेशी तकनीक पर बनाया गया है. आईएपएस तारागीरी प्रोजेक्ट 17 ए के तहत नीलगिरी क्लास का चौथा युद्धपोत है. मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने 28 नवंबर 2025 को नौसेना को सौंप दिया था. यह युद्धपोत इसी नाम के पुराने हो चुके लैंडर क्लास युद्धपोत की जगह लेगा जो वर्ष 1980 से 2013 तक सेवा में रहा. इस युद्धपोत में 75 फीसदी उपकरण स्वदेशी निर्मित हैं और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. भारतीय नौसेना में 3 अप्रैल काे शामिल किया जाएगा. विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इस समारोह की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे.
तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं है बल्कि 6,670 टन वजन वाला युद्धपोत स्वदेशी शिपयार्ड की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रदर्शन भी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में विवाद के कारण समुद्री सुरक्षा चिंता का विषय है. ऐसे में भारत को समुद्री सुरक्षा काे सशक्त बनाने में आईएनएस तारागिरी अहम भूमिका निभा सकता है. यह सुरक्षा के साथ दुश्मनों के हमले का जवाब देने में भी सक्षम है. इस युद्धपोत का निर्माण 81 महीने में पूरा हो गया जो दिखाता है कि भारत समय में आधुनिक युद्धपोत बना सकता है.
क्या है इस युद्धपोत की खासियत
इस युद्धपोत में आधुनिक हथियार और सिस्टम लगे हुए हैं. यह शिप टू शिप ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम ले जाने में सक्षम है. वायु सुरक्षा के लिए इसमें मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (एमआरएसएएम) लगा हुआ है. साथ ही मल्टी-फंक्शन सर्च एंड टारगेट एक्वीजीशन रडार(एमएफएसटीएआर), तेजी से गोली चलाने वाला 76 एमएम का सुपर रैपिड गन भी तैनात है. नजदीकी खतरे से निपटने के लिए इसमें कई हथियार प्रणाली लगायी गयी है. समुद्र के नीचे के खतरे से निपटने के लिए एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से लैस है.
इस युद्धपोत को बहुआयामी मिशन के लिए बनाया गया है और यह मौजूदा और भावी चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगा. घातक स्टील्थ तकनीक, आधुनिक उपकरण और मौजूदा जरूरतों के लिहाज से बना यह युद्धपोत पूर्व के शिवालिक क्लास से कई मायने में बेहतर है. तरागिरी एक संयुक्त डीजल या गैस (सीओडीओजी) प्रोपल्शन सिस्टम द्वारा संचालित है. ऑपरेशन के संचालन के लिए इसमें इंटीग्रेटेड प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम लगा हुआ है.
