Coronavirus : संक्रमित मरीजों की संख्या 19,984 हुई, मरने वाले 640, देखें राज्यवार आंकड़ा

Coronavirus latest update in india देश में कोविड-19 के मरीजों की संख्या 19,984 हो गयी है. इस बात की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी है. मंत्रालय ने बताया है कि कोविड-19 के कारण देश में मरने वाले लोगों की संख्या 640 हो गई और स्वस्थ होकर घर जाने वालों की संख्या 3,869 है.

नयी दिल्ली : देश में कोविड-19 के मरीजों की संख्या 19,984 हो गयी है. इस बात की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी है. मंत्रालय ने बताया है कि कोविड-19 के कारण देश में मरने वाले लोगों की संख्या 640 हो गई और स्वस्थ होकर घर जाने वालों की संख्या 3,869 है. एक मरीज दूसरे देश चला गया. संक्रमण के कुल मामलों में से 77 लोग विदेशी हैं. मंगलवार शाम से कुल 37 लोगों की मौत हुई है जिनमें से 19 लोगों की मौत महाराष्ट्र में, 13 की गुजरात में, तीन की पश्चिम बंगाल में तथा तमिलनाडु और झारखंड में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है.

संक्रमण के कारण देश में कुल 640 लोगों की मौत हुई है जिनमें सर्वाधिक 251 लोगों की मौत महाराष्ट्र में, 90 लोगों की मौत गुजरात में, 76 लोगों की मौत मध्यप्रदेश में, 47 की मौत दिल्ली में, 25 की मौत राजस्थान में, 23 लोगों की मौत तेलंगाना में और 22 लोगों की मौत आंध्र प्रदेश में हुई है. संक्रमण के कारण उत्तर प्रदेश में 20 मौत हुई है. हालांकि मंगलवार तक पीटीआई को राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक देश में कम से कम 646 लोगों की मौत हुई है. स्वास्थ्य मंत्रालय के आज सुबह अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में संक्रमण के सर्वाधिक 5,218 मामले महाराष्ट्र में, 2,178 मामले गुजरात में, 2,156 मामले दिल्ली में, 1,659 मामले राजस्थान में, 1,596 मामले तमिलनाडु में और 1,552 मामले मध्य प्रदेश में हैं.

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बिहार में संक्रमण के कुल मामले 126 मामले में है, जिनमें से दो लोगों की मौत हुई है. वहीं झारखंड में अबतक 45 मरीज मिले हैं, जिनमें से तीन मरीजों की मौत हुई है. बंगाल में 423 मामले में हैं, जिनमें से 15 लोगों की मौत हुई है.

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Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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