अगर हम सावधानी नहीं बरतेंगे और मनमानी करेंगे, तो कोरोना चरम पर पहुंच सकता : स्वास्थ्य मंत्रालय

देश का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि अगर हम इस बात का ध्यान रखेंगे कि हमें क्या करना है और क्या नहीं करना है, तो हम कोरोना को चरम पर पहुंचने से रोक सकते हैं. लेकिन अगर हम जरूरी सावधानी नहीं बरतेंगे कि इसमें कोई दो राय नहीं कि चरम पर पहुंचने की संभावना बनी रहेगी.

देश का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि अगर हम इस बात का ध्यान रखेंगे कि हमें क्या करना है और क्या नहीं करना है, तो हम कोरोना को चरम पर पहुंचने से रोक सकते हैं. लेकिन अगर हम जरूरी सावधानी नहीं बरतेंगे कि इसमें कोई दो राय नहीं कि चरम पर पहुंचने की संभावना बनी रहेगी.

उन्होंने कहा कि देश के 216 जिलों में कोरोना कोई मरीज नहीं मिला है. वहीं 42 जिलों में पिछले 28 दिनों से कोरोना का कोई मरीज नहीं मिला है. हालांकि पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 3390 मरीज सामने आये हैं. उक्त जानकारी हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने दी. देश में अबतक कुल 56342 लोग इस संक्रमण के शिकार हैं. उन्होंने बताया कि रेलवे के 5231 कोच को कोविड केयर सेंटर में बदला जायेगा. इसके लिए रेलवे ने 250 स्टेशनों की पहचान कर ली है. इसमें वैसे मरीजों को रखा जायेगा जिनमें संक्रमण कम या बहुत कम होगा. यहीं पर इन मरीजों का उपचार होगा.

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लव अग्रवाल ने बताया कि देश में कोरोना के आंकड़ों को देखकर राज्यों को एक नयी सूची रेड जोन, आरेंज जोन और ग्रीन जोन की भेजी जायेगी. देश के 29 जिलों में पिछले 21 दिन में कोरोना संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है, वहीं 36 जिलों में पिछले 14 दिनों में कोई मामला सामने नहीं आया है. वहीं 46 जिलों में पिछले सात दिनों से कोई मामला नहीं आया है.

गृह मंत्रालय ने दी श्रमिक स्पेशल ट्रेन की जानकारी

गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार ने देश में 222 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलायी है. इन ट्रेन के जरिये 2.5 लाख लोग अपने घर जा रहे हैं. सरकार दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को अपने घर तक पहुंचाने के लिए यह प्रयास कर रही है. बिहार, यूपी और झारखंड के हजारों मरीज अपने-अपने घर पहुंच चुके हैं और आगे भी यह क्रम जारी है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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