वंदे मातरम् पर कांग्रेस के फैसले से बढ़ा विवाद, अमित शाह बोले- तुष्टीकरण के लिए देश तक बांट दिया

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है. गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC)का वह फैसला देश विरोधी है, जिसमें पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत की केवल पहली दो कड़ियों को ही गाए जाने का निर्णय किया गया है.

गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के निर्णय को संसद के बनाए कानून की खुली अवहेलना भी बताया है. कांग्रेस ने यह निर्णय 1937 के अपने प्रस्ताव और संविधान सभा में अपनाये गये रुख के अनुरूप बताया है.



कांग्रेस के फैसले ने करवाया था देश विभाजन

अमित शाहने गुरुवार को तमिलनाडु में कहा कि कांग्रेस ने 1937 में मुस्लिमों के तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटा था और इसी फैसले की वजह से देश के विभाजन की नींव पड़ी. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब राहुल गांधी के नेतृत्व में उसी तुष्टीकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कांग्रेस की इस गलती को सुधारा है और वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में कदम उठाया है.

कांग्रेस के फैसले पर देश एकजुट हो

अमित शाह ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत और स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले लोगों का अपमान करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि देश को कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करना चाहिए. गृहमंत्री ने कांग्रेस के फैसले की निंदा की है.

बीजेपी के आरोपों को कांग्रेस ने खारिज किया

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है. कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी 1937 से ही वंदे मातरम् की पहली दो कड़ियां गाती रही है. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् कांग्रेस के लिए स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी भावनात्मक विरासत है, जबकि बीजेपी इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है.कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CWC की बैठक में 1937 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस ने भी रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के आधार पर पहली दो कड़ियां गाने का समर्थन किया था.

ये भी पढ़ें : BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को CJP का समर्थन, इस्तीफे की कर रहे हैं मांग


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >