समलैंगिक विवाह के समर्थन में आयी कांग्रेस, LGBT समुदाय के प्राइड मंथ पर किया ट्‌वीट-प्रेम हमें जोड़ता है…

कांग्रेस पार्टी ने एलजीबीटी समुदाय के लोगों का समर्थन तब किया है जब पूरा देश समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है. अभी तक समलैंगिक विवाह को अपने देश में कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है.

कांग्रेस पार्टी के ट्‌विटर हैंडिल से आज एक ट्‌वीट किया गया है जिसके जरिये पार्टी ने एलजीबीटी समुदाय के लोगों को समर्थन देने की एक तरह से घोषणा की है. कांग्रेस पार्टी की ओर से अंग्रेजी में ट्‌वीट किया गया है जिसका अर्थ है प्रेम हमें जोड़ता. प्रेम, समानता और स्वीकृति का उत्सव मनाने के लिए गर्व के साथ खड़े हों.

समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं

कांग्रेस पार्टी ने एलजीबीटी समुदाय के लोगों का समर्थन तब किया है जब पूरा देश समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है. अभी तक समलैंगिक विवाह को अपने देश में कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने पहले जो फैसला दिया है उसके अनुसार समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है, लेकिन समलैंगिक विवाह को अबतक अनुमति नहीं मिली है. समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है और कोर्ट ने इस मसले पर कहा है कि पर्सनल लॉ कानून में प्रवेश किये बिना समलैंगिक विवाह को मान्यता देना मुश्किल है क्योंकि इसके बाद कई तरह की परेशानी उत्पन्न हो सकती है.


राजस्थान सरकार ने किया समलैंगिक विवाह का विरोध

कांग्रेस पार्टी का यह ट्‌वीट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समलैंगिक विवाह के मसले पर जब केंद्र ने राज्यों की राय जानने की कोशिश की थी तो राजस्थान सरकार ने इसका विरोध किया था. राजस्थान की गहलोत सरकार ने कहा था कि अगर समलैंगिक विवाह को मान्यता दी गयी तो इससे सामाजिक व्यवस्था बिगड़ सकती है, लेकिन अगर दो समलैंगिक व्यक्ति साथ रहना चाहते हैं तो वो गलत नहीं है.

क्या है प्राइड मंथ

गौरतलब है कि जून का महीना शुरू हो गया है और जून के महीने को एलजीबीटी समुदाय के लोग जून के महीने को प्राइड मंथ के तौर पर मनाते हैं. यह महीना उनके अधिकारों की लड़ाई को समर्पित है. प्राइड मंथ की शुरुआत अमेरिका के स्टोनवेल में दंगों के बाद हुई, जहां एलजीबीटी समुदाय के लोगों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद किया और तब से वे इसे अपने गौरव से जोड़कर देखते हैं और जून महीने को अपने अधिकारों के लिए समर्पित करते हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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