कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), इसके संस्थापक अभिजीत दीपके और उनका डिजिटल अभियान पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. शुरुआत में यह अभियान पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सामने आया था. इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यंग्यात्मक वीडियो, रील्स और डिजिटल कंटेंट के जरिए यह अभियान बड़ी संख्या में युवाओं तक पहुंचा. जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनीत सिंह ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने CJP को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताई हैं.
छात्र मुद्दों से राजनीतिक बहस तक पहुंचा आंदोलन
CJP का शुरुआती फोकस छात्र समस्याओं और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दों पर रहा. लेकिन समय के साथ इस अभियान को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई. कुछ मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आंदोलन बाद में व्यापक राजनीतिक मुद्दों और सरकार विरोधी नारों से जुड़ गया. आलोचकों का आरोप है कि CJP का स्वरूप धीरे-धीरे छात्र हितों तक सीमित न रहकर राजनीतिक आंदोलन जैसा दिखाई देने लगा. वहीं, समर्थक इसे युवाओं की आवाज और डिजिटल माध्यम से चलाया जा रहा सामाजिक अभियान बताते हैं.
डिजिटल पहुंच और प्रभाव को लेकर चर्चा
सोशल मीडिया की ताकत के जरिए CJP ने कम समय में बड़ी संख्या में लोगों तक अपनी पहुंच बनाई. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं की भागीदारी और तेजी से फैलते कंटेंट ने इस अभियान को चर्चा के केंद्र में ला दिया. CJP को लेकर अब बहस दो हिस्सों में बंटी हुई है. एक ओर समर्थक इसे युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने वाला मंच बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसके राजनीतिक प्रभाव और संभावित उद्देश्यों पर सवाल उठा रहे हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक्स हैंडल किया ब्लॉक
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69(A) के तहत CJP के आधिकारिक एक्स हैंडल को भारत में ब्लॉक कर दिया. रिपोर्टों में वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि यह कार्रवाई इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट के आधार पर की गई. इन इनपुट में राष्ट्रीय संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं के दोबारा आयोजन से पहले संभावित अशांति जैसी चिंताओं का जिक्र किया गया था.
अभिजीत दीपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर विवाद
अभिजीत दीपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा का विषय बनी हुई है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह साल 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) में राष्ट्रीय सोशल मीडिया समन्वयक के रूप में कार्य कर चुके हैं. दीपके का कहना है कि उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने से पहले पार्टी छोड़ दी थी. वहीं, कुछ आलोचकों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने CJP को स्वतंत्र छात्र आंदोलन के बजाय राजनीतिक प्रभाव वाला अभियान बताया.
विपक्षी संगठनों की भूमिका को लेकर भी लगे आरोप
कुछ सोशल मीडिया पोस्टों में आरोप लगाया गया कि आंदोलन में विभिन्न विपक्षी दलों, भीम आर्मी और कुछ वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी सक्रिय थे. CJP को लेकर राजनीतिक बहस भी लगातार जारी है. समर्थक इसे युवाओं द्वारा संचालित एक डिजिटल और सामाजिक अभियान बता रहे हैं. जबकि, आलोचक इसके पीछे राजनीतिक मकसद होने का आरोप लगाते हैं.
RTI कार्यकर्ता ने ECI और CBIC से की शिकायत
इसी कड़ी में सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके परिवार से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच की मांग की है. उन्होंने महाराष्ट्र सरकार, भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) को अलग-अलग शिकायतें भेजी हैं. तिवारी का दावा है कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर थे. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनकी मासिक आय 60 से 65 हजार रुपये थी, तो उन्होंने अपने बेटे की अमेरिका में उच्च शिक्षा का खर्च कैसे उठाया.
अमित तिवारी ने ECI से शिकायत में आरोप लगाया कि CJP राजनीतिक दल की तरह काम कर रही है और चंदा स्वीकार कर रही है, जबकि उसका पंजीकरण नहीं है. उन्होंने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत कार्रवाई की मांग की. वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए कथित एक करोड़ रुपये के फंड को लेकर उन्होंने CBIC से कर देयता (Tax Liability) की जांच का अनुरोध किया है
