Chhattisgarh Election 2023: 'कांग्रेस 4 साल से जनता को छल रही है', सीएम बघेल के ऐलान के बाद भाजपा का प्रहार

Chhattisgarh Election 2023: सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि मैं घोषणा करता हूं कि अगले वित्त वर्ष से बेरोजगारों को हर महीने बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. भाजपा ने घोषणा के बाद किया कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला

Chhattisgarh Election 2023: इस साल छत्तीयगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो चली है. गणतंत्र दिवस के दिन सूबे के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कई योजनाओं का ऐलान किया. उन्होंने बेरोजगारों को भत्ता देने की भी बात भी कही है. इसके बाद प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सीएम बघेल पर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि चार साल राज्य में कोई काम नहीं हुआ, कोई सड़क नहीं बनी, पुल नहीं बना, अस्पताल नहीं बना, पुलिया नहीं बनी…आखिरी साल है जितनी घोषणाएं करनी हैं कर लें. 4 साल से जनता को छल रहे हैं, घोषणा पत्र झूठा था, ये सिर्फ जनता की आंख में धुल झोंकने का काम है.

एक नजर डालते हैं छत्तीसगढ़ के सीएम ने क्या क्या किया ऐलान

छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर के लालबाग परेड मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद लोगों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने बेरोजगारी भत्ता का ऐलान किया. इसके अलावा भी उन्होंने कई घोषणाएं कीं. रायपुर विमानतल के करीब एरोसिटी बनाने, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए नयी योजना शुरू करने एवं निर्माण श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना शुरू करने समेत कई घोषणाएं सीएम बघेल के द्वारा की गयी. एक नजर घोषनाओं पर…

-26 जनवरी 2023 को को छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि मैं घोषणा करता हूं कि अगले वित्त वर्ष से बेरोजगारों को हर महीने बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा.

-सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि रायपुर हवाई अड्डे में यात्री सुविधाओं को बढ़ावा देने, हवाई अड्डा क्षेत्र के वाणिज्यिक विकास और रोजगार सृजन के लिये स्वामी विवेकानंद विमानतल के पास एयरोसिटी विकसित की जाएगी.

-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में लगातार तीन साल पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को अपना मकान बनाने के लिए 50 हजार रुपये अनुदान देने की योजना लायी जाएगी.

-छत्तीसगढ़ में कुटीर उद्योग आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और रोजगार एवं लोगों की आय बढ़ाने के लिये ग्रामीण उद्योग नीति बनाई जायेगी.

-महिला समूहों, महिला उद्यमियों और महिलाओं के स्टार्ट अप को उद्योग स्थापित करने में मदद करने के लिए नवीन योजना शुरू की जाएगी.

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-आगामी वित्त वर्ष से सरकार बस्तर संभाग, सरगुजा संभाग और राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के पर्वों के उत्तम आयोजन के लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत को 10 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रदान करेगी.

-उद्योग विभाग द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इकाईयों को संपत्ति कर के भार से मुक्त किया जायेगा.

-छत्तीसगढ़ की संस्कृति और विरासत को सहेजने और संजोने के बाद छत्तीसगढ़ को प्रगति पथ पर अनवरत आगे बढ़ाने के लिये राज्य में छत्तीसगढ़ राज्य नवाचार आयोग का गठन किया जायेगा.

-खारून नदी पर उत्कृष्ट ‘रिवर फ्रंट’ विकसित करने की घोषणा.

-छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की धरती है इसलिए प्रतिवर्ष चंदखुरी में कौशल्या महोत्सव आयोजित किया जाएगा.

भाषा इनपुट के साथ

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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