चमोली टनल हादसा: 10 लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा

उत्तराखंड के चमोली टनल हादसे में सभी 10 लापता मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए हैं. इसके साथ ही टनल में चल रहा बचाव अभियान भी पूरा हो गया है. घटना में मारे गए सभी श्रमिकों के पार्थिव शरीर उनके परिवारों को सौंप दिए जाएंगे.

उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी टनल हादसे में मंगलवार( 18 अगस्त ) दो मजदूरों के शव बरामद कर लिए गए. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक दोनों शव मिलने के साथ ही टनल में चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो गया. हादसे में कुल 10 मजदूरों की मौत हुई है और सभी के शव बरामद कर लिए गए हैं.

कठिन हालात में चला सर्च अभियान

रेस्क्यू टीमों ने टनल के भीतर पानी की निकासी, मलबा हटाने और मशीनरी बाहर निकालने के साथ संभावित स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया. पानी निकालने के लिए सक्शन पंप समेत आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया.

प्रशासन ने लगातार की निगरानी

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने पूरे रेस्क्यू अभियान की लगातार निगरानी की. जिला प्रशासन, पुलिस, SDRF, NDRF, THDCऔर अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ अभियान चलाया गया.

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श्रमिकों को दी गई चिकित्सा सहायता

अभियान के दौरान प्रभावित श्रमिकों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई. जिन मजदूरों को उपचार की जरूरत थी, उन्हें अस्पताल भेजा गया और उनके स्वास्थ्य की लगातार जानकारी ली गई.

कई एजेंसियों ने निभाई अहम भूमिका

रेस्क्यू अभियान में ITBP, Army, NDRF, SDRF, DDRF, पुलिस, राजस्व विभाग और CISF की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सभी एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से लापता श्रमिकों की तलाश पूरी हुई और अभियान समाप्त कर दिया गया.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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