Parliament Budget Session: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है. बुधवार को लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो बहुत अफसोसजनक है. शाह ने सदन में विपक्ष के संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि किसी को भी नियम के विपरीत बोलने का अधिकार नहीं है. शाह ने कहा कि अध्यक्ष के फैसले पर असहमति हो सकती है, लेकिन उनका फैसला अंतिम होता है. शाह ने यह भी कहा कि जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े हो जाते हैं.
सभापति को रोकने, टोकने और सदन से बाहर करने का अधिकार: अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बजट सत्र के पिछले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के चैंबर में ऐसा माहौल बन गया था कि अध्यक्ष की सुरक्षा की चिंता पैदा हो गई. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई सदस्य सदन के नियमों का उल्लंघन करता है, तो लोकसभा अध्यक्ष के पास उसे रोकने, टोकने और बाहर निकालने का अधिकार है.
अमित शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि कल केसी वेणुगोपाल ने मुद्दा उठाया कि विपक्ष के नेता को 38 से 40 बार रोका और टोका गया, लेकिन स्पीकर ने एक बार किसी को टोकने के बाद अगर वही बात दोबारा कही जाए, तो स्पीकर के पास कोई विकल्प नहीं बचता. शाह ने कहा कि जब राजनाथ सिंह ने कहा कि अप्रकाशित पुस्तक या पत्रिका का उद्धरण नहीं दिया जा सकता, तो इसका उल्लंघन करने वाले सदस्य को स्पीकर टोक सकते हैं.
18वीं लोकसभा में 71 घंटे में आपने क्या बोला-अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 18वीं लोकसभा में सदस्यों को कुल 71 घंटे का समय दिया गया, लेकिन उन्होंने कितना बोले? उन्होंने पूछा कि विपक्ष के नेता की पार्टी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया, फिर भी विपक्ष के नेता उस पर क्यों नहीं बोलते. अमित शाह ने कहा कि यह ठीक नहीं है… या तो वे बोलना नहीं चाहते, या बोलना चाहते हैं तो नियमों के अनुसार बोलना नहीं जानते.
विपक्ष के बोलने नहीं देने की शिकायत पर अमित शाह का जवाब
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें बोलने का मौका नहीं मिल रहा और उनकी आवाज दबाई जा रही है. उन्होंने कहा “मैं उनसे पूछना चाहता हूं, किसने तय करना है कि किसे बोलना है? स्पीकर? नहीं, यह आपको तय करना है. जब बोलने का मौका आता है, तब आप जर्मनी या इंग्लैंड में दिखते हैं, और फिर शिकायत करते हैं.”
शाह ने बताया कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसद कुल 157 घंटे 55 मिनट बोल चुके हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष के नेताओं ने कितना बोला और क्यों नहीं बोले. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी स्पीकर ने उन्हें रोक नहीं सकता और यह कार्रवाई केवल लोकसभा को बदनाम करने के लिए की जा रही है.
राहुल गांधी की संसद उपस्थिति पर अमित शाह ने किया हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका विदेश दौरे और संसद सत्रों का समय बेहद संयोगपूर्ण है. उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र 2025 में राहुल गांधी जर्मनी, बजट सत्र 2025 में वियतनाम, बजट सत्र 2023 में इंग्लैंड, बजट सत्र 2018 में सिंगापुर और मलेशिया, मॉनसून सत्र 2020 में विदेश यात्रा पर थे, वहीं बजट सत्र 2015 में भी वे विदेश में थे. शाह ने सवाल किया कि जब सांसद विदेश में होते हैं तो संसद में कैसे बोल सकते हैं. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जर्मनी, इंग्लैंड या सिंगापुर में है, वह यहां कैसे बोल पाएगा? यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का प्रावधान नहीं है.
हमने कभी स्पीकर के खिलाफ नहीं लाया अविश्वास प्रस्ताव- शाह
विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष ने तीन बार लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव लाया. उन्होंने कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं लेकिन बीजेपी और एनडीए (NDA) कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाई.
वरिष्ठ सदस्य इन्हें सिखाते क्यों नहीं- अमित शाह ने कसा तंज
लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा यह भी कहा कि स्पीकर का प्रथम कर्तव्य व्यवस्था और शिष्टाचार को बनाए रखना होता है. कोई भी व्यक्ति खड़े होकर अपने मन से कुछ भी बोलेगा तो स्पीकर को उसे बैठाना पड़ेगा क्योंकि विषय तय होते हैं. अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि शशि थरूर, बालू साहब जैसे कितने वरिष्ठ सदस्य हैं वहां, मुझे समझ नहीं आता कि वे क्यों नहीं सिखाते इन्हें. इतना सिखा दें तो समस्या का वहीं समाधान हो जाए.”
बोले अमित शाह- स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्पीकर सभी के होते हैं. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है. स्पीकर जब चुने गए थे उस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों नेता ने उन्हें चेयर तक लेकर गए थे. स्पीकर किसी दल के नहीं होते हैं सदन के होते हैं. एक प्रकार से सदन के सभी सदस्यों के अधिकार के वे संरक्षक भी होते हैं. उन्होंने कहा संसद आपसी विश्वास और नियमों से चलती है, इसलिए स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना सही नहीं है.
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