Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन केवल आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे साफ तौर पर मजबूत राजनीतिक संदेश भी छिपा है. सरकार ने यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की है, जब देश में राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा पर हालात राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं. कश्मीर में आतंकी हमले के बाद चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी सरकार की उस छवि को मजबूत करती है, जिसमें वह खुद को कठोर और निर्णायक नेतृत्व के तौर पर पेश करना चाहती है. यह संदेश न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी जाता है कि भारत अपनी सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं करेगा. रक्षा क्षेत्र के लिए यह आवंटन पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है. सरकार का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने और सेनाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा सेनाओं के आधुनिकीकरण पर खर्च किया जायेगा. सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल के 1.80 लाख करोड़ रुपये से करीब 21.8 प्रतिशत अधिक है. इसमें से 63,733 करोड़ रुपये लड़ाकू विमानों और एयरो इंजन के लिए तथा 25,023 करोड़ रुपये नौसेना के जहाजों और बेड़े के निर्माण के लिए निर्धारित किए गये हैं. इससे साफ है कि सरकार वायुसेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ थलसेना को भी आधुनिक हथियारों से लैस करने पर जोर दे रही है.
स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा
बजट में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के फंड में भी इजाफा किया गया है. डीआरडीओ का बजट 26,816.82 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 29,100.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसमें से 17,250.25 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं. यह बढ़ोतरी आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीक, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और नयी पीढ़ी के प्लेटफॉर्म विकसित करने में मददगार साबित होगी. इसके साथ ही पेंशन और रोजमर्रा के खर्च डिफेंस सर्विसेज, पेंशन आदि में भी अच्छी खासी वृद्धि की गयी है.
बजट से रक्षा उद्योग को भी फायदा होगा क्योंकि यह भी घोषणा की गई है कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल में इस्तेमाल होने वाले पुर्जों के निर्माण से जुड़े कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी. इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को लागत में राहत मिलेगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पेश किया गया यह बजट देश की रक्षा क्षमताओं को और सशक्त बनाने का संकल्प दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन स्थापित करता है.
