Budget 2026 Defence Allotment: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश किया. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आने वाला यह पहला बजट है, इसलिए बेहद खास रहा. इसमें रक्षा क्षेत्र को लेकर बड़े फैसले लिया गया. खास तौर पर रक्षा पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में तेजी लाई गई है, ताकि आधुनिकीकरण और स्वदेशी खरीद को गति मिल सके. निर्मला सीतारमण ने यह केंद्रीय बजट रिकॉर्ड नौवीं बार पेश किया. केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. इसमें से रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत व्यय (कैपिटल आउटले) के तहत 2.19 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
कुल मिलाकर रक्षा मंत्रालय के बजटीय आवंटन में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत व्यय 21.84 प्रतिशत बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह वित्त वर्ष 2025-26 के 1.80 लाख करोड़ रुपये था. वहीं रक्षा सेवाओं के रेवेन्यू और कैपिटल स्पेंडिंग के लिए 3,65,478.98 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो 17.24 प्रतिशत की वृद्धि है.
रक्षा मंत्रालय के पास कई बड़े प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं, जिनमें राफेल लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और मानव रहित हवाई वाहनों (ड्रोन) से जुड़े अनुबंध शामिल हैं. नए बजट में पूंजीगत आवंटन के तहत 63,733 करोड़ रुपये विमान और एयरो इंजन के लिए रखे गए हैं. इसके अलावा, रक्षा सेवाओं के राजस्व खर्च (रेवेन्यू) 17.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इसमें रोजमर्रा के संचालन, रखरखाव, गोला-बारूद, ईंधन, मरम्मत और सहयोगी कर्मचारियों के वेतन जैसे खर्च शामिल होते हैं.
रक्षा पेंशन के लिए भी आवंटन बढ़ाकर 1.71 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, यह 6.53 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. रक्षा पेंशन के लिए भी आवंटन बढ़ाकर 1,71,338.22 करोड़ रुपये कर दिया गया है. हालांकि, रक्षा मंत्रालय (नागरिक) का बजट पिछले वर्ष के 28,554.61 करोड़ रुपये की तुलना में 0.45 प्रतिशत कम है.
भारत का इस वित्तीय वर्ष का कुल बजट 53.5 लाख करोड़ रुपये का है. पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, 2026-27 के लिए भारत का डिफेंस बजट पूरी जीडीपी का 2% है.
किया गया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद, रक्षा खर्च बढ़ना पहले से ही तय माना जा रहा था. यह 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान के साथ पहली बड़ी सैन्य झड़प थी. चार दिनों के युद्ध में भारत ने अपनी हवाई ताकत और सैन्य क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया था. बजट से पहले सूत्रों ने संकेत दिया था कि रक्षा मंत्रालय लगभग 20 प्रतिशत वृद्धि चाहता है.
रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा विमान के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) के लिए उपयोग होने वाले पुर्जों के निर्माण में आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट दी जाएगी. अमेरिकी टैरिफ के जवाब में, वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात किए जाने वाले सभी शुल्क योग्य सामानों पर कस्टम ड्यूटी दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा.
पांच सालों में भारत लगातार बढ़ा रहा डिफेंस खर्च
भारत सुरक्षा जरूरतों और वित्तीय संतुलन के बीच तालमेल बना रहा है, साथ ही रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ा रहा है. सरकार का ध्यान आधुनिकीकरण, तेज खरीद प्रक्रिया और आयात पर निर्भरता कम करने पर बना हुआ है. खास तौर पर आधुनिकीकरण के लिए अलग से रखा गया बजट 24% बढ़ाया गया है, जिससे साफ है कि अब प्लेटफॉर्म, हथियारों और तकनीक के उन्नयन पर ज्यादा जोर दिया जाएगा.
रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 26 वर्षों में भारत का रक्षा खर्च 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुका है. पिछले पांच वर्षों में इसकी औसत सालाना वृद्धि दर करीब 9.2% रही है. सरकार का जोर रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत निवेश बढ़ाने, स्वदेशी अनुसंधान और निर्माण को बढ़ावा देने तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करने पर है. साथ ही, रक्षा निर्यात से राजस्व बढ़ाने पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है.
स्वदेशीकरण पर भारत का जोर
रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) लगातार प्राथमिकता में रहा है, क्योंकि इससे आधुनिकीकरण तेज करने और स्वदेशी निर्माण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है. नया बजट भी इसी रुझान को मजबूत करता है, जिसमें पूंजीगत खर्च का हिस्सा कुल रक्षा बजट में पहले से ज्यादा रखा गया है.
भारत की स्वदेशीकरण (इंडिजेनाइजेशन) की पहल रक्षा क्षेत्र की दिशा तय करती जा रही है. वित्त वर्ष 2025 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 12.04% अधिक है. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को ₹3 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाना है.
पिछले साल भारत ने कितना खर्च किया था?
2025-26 के बजट में रक्षा मंत्रालय को ₹6.81 लाख करोड़ मिले थे, जो पिछले साल से 9.5% ज्यादा था. यह कुल केंद्रीय बजट का लगभग 13.5% हिस्सा था. सबसे ज्यादा आवंटन पाने वाला मंत्रालय डिफेंस ही बना था. जनवरी 2026 में सरकार ने बताया था कि दिसंबर तक सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए ₹1.82 लाख करोड़ के पूंजीगत अनुबंध किए जा चुके हैं. ऐसे में सरकार ने इस बार भी बढ़ोतरी की है. हालांकि, इस बार सबसे ज्यादा पैसा ट्रांसपोर्ट सेक्टर में अलॉट किया गया है.
पिछले साल भारत सरकार ने रक्षा पर कुल खर्च जीडीपी का केवल 1.9% किया था, जो 2020-21 के 2.1% से भी कम है. कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत को रक्षा पर जीडीपी का 3-4% तक खर्च करना चाहिए. संसद की स्थायी समिति भी 3% खर्च की सिफारिश कर चुकी है.
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