operation dost turkey

Boycott Turkey: तुर्की ने जिस भारत के पीठ पर घोंपा छुरा, उसने भीषण भूकंप में मसीहा बन की थी मदद

Boycott Turkey: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच सोशल मीडिया पर सबसे अधिक चर्चा तुर्की (Turkey) को लेकर हो रही है. भारत में तुर्की और अजरबैजान बॉयकॉट नारे बुलंद हो रहे हैं. पिछले दो दिनों से #BoycottTurkey ट्रेंड कर रहा है. करे भी क्यों न? आखिर तुर्की ने ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देकर भारत के पीठ पर छुरा घोंपने का काम किया है.

Boycott Turkey: पाकिस्तान का साथ देकर तुर्की (Turkey) ने भारत से पंगा ले लिया है. उसने ऑपरेशन सिंदूर (operation sindoor) के खिलाफ पाक को नैतिक, कूटनीतिक और सैन्य समर्थन दिया था. साथ ही भारत के ऑपरेशन को पाकिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ भी बताया था. तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन, युद्धपोत और सैन्य मदद की, जिसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया गया. तुर्की 2 साल पहले भारत की मदद को भूल गया. जब भूकंप की मार से पूरा तुर्की कराह रहा था, तो ऑपरेशन दोस्त चलाकर भारत ने मसीहा का काम किया था. लेकिन उस उपकार का बदला तुर्की ने भारत के पीठ पर छुरा घोंपकर चुकता किया है.

Boycott Turkey: भूकंप से तबाह तुर्की को भारत ने की थी बड़ी मदद, चलाया था ऑपरेशन दोस्त

6 फरवरी 2023 को तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था. जिसमें 50 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 1 लाख से अधिक लोग घायल हुए थे. इसके अलावा लाखों लोग बेघर हो गए, तो 3 लाख से अधिक इमारत ढह गईं या क्षतिग्रस्त हो गईं. तुर्की जब भूकंप से कराह रहा था, तब सबसे पहले मदद के लिए भारत ने हाथ बढ़ाया. भारत ने 12 घंटों के अंदर राहत सामग्री और बचाव दल को तुर्की में उतार दिया. करीब 7 करोड़ की राहत सामग्री भारत ने भेजी, जिसमें दवाइयां, चिकित्सा उपकरण, भोजन, और टेंट शामिल थे. भारत ने एनडीआरएफ की तीन टीमों को भी तुर्की में तैनात किया. चिकित्सा सेवा के तौर पर भारत ने 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल से 99 सदस्यीय चिकित्सा दल भेजा. भारत ने तुर्की को ड्रोन सहायता भी दी. भारत ने गरुड़ एयरोस्पेस के ड्रोनी ड्रोन और किसान ड्रोन भेजे, जो मलबे में फंसे लोगों का पता लगाने और दवाइयां और भोजन पहुंचाने में मददगार रहे.

Turkey-earthquake-operation-dost

Boycott Turkey: तुर्की ने भी माना था भारत ने सबसे पहले मदद की

भीषण भूकंप में भारत की मदद की सराहना खुद तुर्की ने किया था. वहां के राजदूत फिरात सुनेल ने कहा था कि भारत सबसे पहले मदद करने वाले देशों में से एक था. भारत ने तुर्की की मदद के लिए जो ऑपरेशन चलाया था, उसे ऑपरेशन दोस्त का नाम दिया था. तुर्की के राजदूत ने भी भारत को दोस्त कहकर सराहना की थी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >