लोकसभा चुनाव: क्या नहीं खुलेंगे कमलनाथ के लिए बीजेपी के दरवाजे? जानें ऐसा क्यों

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ के बीजेपी में जाने की अटकलों के बीच पार्टी नेता जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए भोपाल पहुंचेगे. जानें कमलनाथ को लेकर खास बातें

मध्य प्रदेश की राजनीति में कमनाथ की चर्चा इन दिनों जोरों पर हो रही है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता कमलनाथ के बीजेपी में जाने की अटकलें लगाई जा रही है. इन अटकलों को लेकर उनका कुछ भी बयान सीधे तौर पर सामने नहीं आया है लेकिन दिग्गज नेता और कमलनाथ (Kamal Nath) के करीबी नेता सज्जन सिंह वर्मा ने उनके पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज कर दिया है. वर्मा ने कमलनाथ के दिल्ली स्थित आवास पर उनसे मुलाकात के बाद मीडिया से बात की और कहा कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं, साथ ही उनके पुत्र नकुलनाथ कांग्रेस के टिकट पर अपने वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा से चुनावी मैदान में उतरेंगे.

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

मामले पर राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया सामने आई है. उनका कहना है कि बीजेपी लोकसभा चुनाव से पहले कमलनाथ को शामिल करने से कतरा रही है. कमलनाथ यदि बीजेपी का दामन थम लेते हैं तो पार्टी को सिख संगठनों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है. आपको बता दें कि बीजेपी लगातार कमलनाथ पर 1984 में दिल्ली में सिख विरोधी दंगों को भड़काने का आरोप लगाते आ रही है. यदि आपको याद हो तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने खुलेआम कमलनाथ पर सिख विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया था और कांग्रेस पर जोरदार हमला किया था. हालांकि कमलनाथ ने करीब चार दशक पहले हुए दंगों में शामिल होने के आरोपों को बार-बार खारिज किया है. अब देखना है कि आगे क्या होता है.

क्या बीजेपी नहीं लेना चाहती कोई भी जोखिम

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो लोकसभा चुनाव नजदीक है. ऐसे में कमलनाथ को बीजेपी में शामिल करने का जोखिम पार्टी नहीं उठाना चाहती है. कमलनाथ पर सिख विरोधी दंगों में शामिल होने का आरोप है और पंजाब में अकाली दल के साथ बीजेपी की बात नहीं बन पाई है. यदि कमलनाथ बीजेपी में शामिल होते हैं तो इसका खामियाजा पार्टी को सिख बहुल क्षेत्र में भुगतना पड़ सकता है.

क्यों अटकलें हुईं तेज

यहां चर्चा कर दें कि दिग्गज नेता कमलनाथ और नकुलनाथ के कांग्रेस छोड़ने को लेकर अटकलें पिछले दिनों से मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है. अटकलों को गत शनिवार को उस वक्त बल मिला जब नकुलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर अपने बायो से ‘कांग्रेस’ शब्द हटा दिया था. मध्य प्रदेश में सभी की निगाहें कांग्रेस खेमे के भीतर के घटनाक्रम पर हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि पार्टी आंतरिक चुनौतियों के साथ-साथ बाहरी दबावों से जूझ रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कमलनाथ के आवास के ऊपर भगवा झंडा भी लहराता नजर आया था जिसे बाद में हटा लिया गया.

कमलनाथ के सहयोगियों ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कुछ दिन पहले कमलनाथ के सहयोगियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि नेतृत्व द्वारा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का अपमान किया जा रहा है. उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव कमलनाथ के नेतृत्व में लड़ा था. चुनाव से पहले कहा जा रहा था कि प्रदेश में इस बार कांग्रेस की सरकार बनेगी, लेकिन चुनाव परिणाम कुछ और ही आए. इसके बाद कमलनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.

कांग्रेस की अहम बैठक बुलाई गई

इस बीच खबर है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल में मौजूदा विधायकों सहित पार्टी के सीनियर नेताओं की एक बैठक बुलाई है. मंगलवार यानी आज होने वाली इस बैठक में प्रभारी जितेंद्र सिंह और जीतू पटवारी समेत विधायक पूर्व विधायक, जिला अध्यक्ष और पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे. बैठक में लोकसभा चुनाव और राहुल गांधी की राज्य में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के साथ-साथ कलमनाथ और नकुलनाथ के बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर भी चर्चा हो सकती है.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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