गुजरात चुनाव 2022: आदिवासी वोट पर पार्टियों की नजर, बीटीपी ने उतारे अपने उम्मीदवार

गुजरात चुनाव 2022: प्रदेश अध्यक्ष रमेश वसावा ने कहा कि 27 अनुसूचित जनजाति-आरक्षित सीट के अलावा, हम अंकलेश्वर और ओलपाड जैसी 30 से 40 प्रतिशत आदिवासी मतदाताओं वाली सीट पर भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे.

गुजरात चुनाव की घोषणा के बाद सभी पार्टियों ने कमर कस ली है और अपने तगड़े उम्मीदवार को मैदान में उतार रही है. इस क्रम में उम्मीदवारों की ताजा सूची भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) की ओर से जारी की गयी है. पार्टी ने गुजरात की 12 विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची की रविवार को जारी की. इस सूची की बात करें तो इसमें अनुसूचित जनजाति (एसटी) की नौ आरक्षित सीटें शामिल हैं.

भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के प्रदेश अध्यक्ष रमेश वसावा ने कहा कि पार्टी अगले महीने होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए राज्य भर में सभी 27 एसटी-आरक्षित सीट पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. पार्टी ने राज्य में 2017 के चुनावों में दो सीट जीती थीं. एसटी-आरक्षित नौ सीट के अलावा बीटीपी ने कर्जन, जंबुसर और ओलपाड के लिए भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा की. ये तीनों सीट सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए है. शेष नौ सीट भिलोदा, झालोद, दाहोद, सांखेड़ा, नंदोद, व्यारा, निजार, डांग और धरमपुर हैं.

आदिवासी मतदाताओं वाली सीट पर उम्मीदवार उतारेगी ट्राइबल पार्टी

प्रदेश अध्यक्ष रमेश वसावा ने कहा कि 27 अनुसूचित जनजाति-आरक्षित सीट के अलावा, हम अंकलेश्वर और ओलपाड जैसी 30 से 40 प्रतिशत आदिवासी मतदाताओं वाली सीट पर भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे. वर्तमान में, गुजरात विधानसभा में बीटीपी के पास दो सीट भरूच में झघड़िया और नर्मदा जिले में डेडियापाड़ा है. बीटीपी के संस्थापक छोटू वसावा झघड़िया विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश वसावा डेडियापाड़ा का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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कुल आबादी का लगभग 15 प्रतिशत हैं आदिवासी

यहां चर्चा कर दें कि पिछले दिनो, छोटू वसावा ने गुजरात में आम आदमी पार्टी (आप) के साथ अपना नाता तोड़ लिया था. चुनाव नजदीक आने के बीच कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे के समझौते की किसी भी संभावना के बारे में उन्होंने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. गुजरात में दो चरणों में एक दिसंबर और पांच दिसंबर को चुनाव होंगे. 2011 की जनगणना के अनुसार, गुजरात में 89.17 लाख आदिवासी थे, जो इसकी कुल आबादी का लगभग 15 प्रतिशत है. समुदाय के सदस्य बड़े पैमाने पर राज्य के 14 पूर्वी जिलों में रहते हैं. आदिवासी आबादी 48 तालुका में केंद्रित है.

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