क्या न्याय यात्रा जनता की अदालत में कांग्रेस को दिला पाएगी जस्टिस?

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की बात करें तो यह 14 जनवरी को मणिपुर में शुरू हुई थी और 20 मार्च को यह मुंबई में समाप्त होगी. इस बीच जानें कांग्रेस की चुनौती और उसकी उम्मीद के बारे में खास बातें

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ चल रही है. यह यात्रा 14 जनवरी को मणिपुर की राजधानी इंफाल से निकाली गई है जो अब पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर गई. इस यात्रा पर सत्ता पक्ष की नजर भी बनी हुई है. इस यात्रा का नाम कांग्रेस ने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ रखा है जिसपर बीजेपी लगातार हमलावर है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को पहले अपने नेताओं को न्याय देना चाहिए. उसके बाद पार्टी को दूसरे को न्याय देने के संबंध में बात करनी चाहिए. बीजेपी का यह बयान महाराष्ट्र के दिग्गज नेता मिलिंद देवड़ा के पार्टी छोड़ने के बाद आया था. देवड़ा ने कांग्रेस की इस यात्रा से ठीक पहले कांग्रेस का दामन छोड़ा था और शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हुए थे. यात्रा को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में आ रहे हैं जैसे लोकसभा चुनाव में क्या इस यात्रा का फायदा कांग्रेस को मिलेगा ? तो आइए जानते हैं कांग्रेस के सामने क्या है चुनौती और पिछली भारत जोड़ो यात्रा से पार्टी को क्या हुआ था लाभ…

लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के सामने चुनौती

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा : 22 जनवरी देश में राम नाम की धुन सुनाई पड़ी थी. अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की पूजा हुई. इसके लिए कांग्रेस को भी निमंत्रण मिला लेकिन न तो इस समारोह में सोनिया गांधी पहुंचीं और न ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही पहुंचे. कांग्रेस नेता प्रमोद आचार्य ने इसे लेकर अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा किया था. जानकारों की मानें तो इसका लाभ लोकसभा चुनाव में बीजेपी उठा सकती है.

कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारत रत्न की घोषणा की गई है. लोकसभा चुनाव के पहले और कांग्रेस की यात्रा के बीच में इस घोषणा के कई मायने निकाले जा रहे हैं. कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती 24 जनवरी को मनाई गई. कर्पूरी की जयंती पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से लेकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) तक, सबने कार्यक्रम का अयोजन किया. कर्पूरी की जयंती से कुछ ही घंटे पहले केंद्र सरकार ने मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने का ऐलान किया. कर्पूरी ठाकुर की बात करें तो वे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं. केंद्र सरकार के इस ऐलान के बाद से प्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई है.

इंडिया गंठबंधन में टूट: विपक्षी दलों ने एक गठबंधन बनाया है जिसे ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) नाम दिया गया है. इस गंठबंधन को लोकसभा चुनाव से पहले जोरदार झटका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने दिया है. टीएमसी ने ऐलान किया है कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव राज्य में अकेले लड़ेगी. कुछ इसी तरह के तेवर आम आदमी पार्टी पंजाब और दिल्ली में दिखा रही है.

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कांग्रेस को ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ से क्यों है ज्यादा उम्मीद?

‘भारत जोड़ो यात्रा’ का लाभ मिला था कांग्रेस को: वर्तमान यात्रा से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाली थी. इस यात्रा का लाभ उन्हें दो राज्यों में मिला. पहली यात्रा के बाद कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस सरकार बनाने में सफल रही, हालांकि कांग्रेस छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनाव हार गई. मणिपुर से इस बार ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ शुरू किया गया जहां हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. जानकारों की मानें तो कांग्रेस नॉर्थ-इस्ट में फिर अपनी पैंठ बनाना चाहती है.

बेरोजगारी और महंगाई को कांग्रेस ने बनाया मुद्दा: ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कांग्रेस बेरोजगारी और महंगाई को मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रही है. राहुल गांधी यात्रा के रास्ते में युवाओं से बात कर रहे हैं और बेरोजगारी पर बात कर रहे हैं. महंगाई के मुद्दे को भी कांग्रेस उठा रही है. खासकर रसोई गैस की कीमत को लेकर कांग्रेस केंद्र पर हमलावर है.

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कब तक चलेगी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ की बात करें तो यह 14 जनवरी को मणिपुर में शुरू हुई थी और 20 मार्च को यह मुंबई में समाप्त होगी. यात्रा 15 राज्यों के 110 जिलों से गुजरते हुए 67 दिनों में 6,713 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली है. कांग्रेस को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में उसे इस यात्रा का लाभ मिलेगा.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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