असम में बाढ़ से हाहाकार: 6.5 लाख लोग प्रभावित, 66 से अधिक की मौत; पीएम मोदी ने फोन पर ली जानकारी

असम में रविवार को बारिश रुकने से बाढ़ की स्थिति में मामूली सुधार हुई है. प्रभावित इलाकों में जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन राज्य के छह जिलों में अब भी 6.50 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं. पिछले 24 घंटों में बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 4 और लोगों की मौत हो गई. इस साल असम में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 66 हो गई.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिनों में दूसरी बार असम के हालात का जायजा लिया. शनिवार को मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से बातचीत करने के बाद, रविवार को पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को फोन कर बाढ़ और राहत कार्यों की जानकारी ली.

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया दौरा

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने एक्स पर बताया, “प्रधानमंत्री ने असम की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली. मैं इस समय डिब्रूगढ़ के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति का आकलन कर रहा हूं. मोदी सरकार असम के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और केंद्र की ओर से राहत व पुनर्वास के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है.”

ऊपरी असम के जिलों में सुधार, शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMC) के अनुसार, ऊपरी असम के अधिकांश इलाकों- विशेषकर चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट में जलस्तर घट रहा है. हालांकि, मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक चराइदेव, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर के 810 गांव अब भी जलमग्न हैं. बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान शिवसागर जिले को पहुंचा है, जहां लगभग 2.90 लाख लोग प्रभावित हैं. इसके बाद चराइदेव में 1.90 लाख और जोरहाट में 1.30 लाख लोग राहत की बाट जोह रहे हैं. बीते 24 घंटे में हुई चार मौतों में से तीन शिवसागर और एक चराइदेव से दर्ज की गई है. नदियों के जलस्तर की बात करें तो फिलहाल शिवसागर में दिखौ नदी और नुमालीगढ़ में धानसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

राहत शिविरों में 18 हजार से अधिक लोग, केंद्र की टीम भी पहुंची

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन ने छह जिलों में 274 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र बनाए हैं, जहां इस समय 18,902 विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं. थल सेना, NDRF, SDRF, पुलिस और अन्य नागरिक एजेंसियां लगातार बचाव अभियान में जुटी हुई हैं. पीड़ितों के बीच बड़े पैमाने पर चावल, दाल, नमक और सरसों के तेल का वितरण किया जा रहा है.


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लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

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एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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